Sankashti Chaturthi Vrat 2020: संकष्टि चतुर्थी व्रत पर भगवान गणेश का पूजन करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं. फाल्गुन मास की संकष्टी चतुर्थी 12 फरवरी, बुधवार को है.

संकष्टि चतुर्थी शुभ मुहूर्त

फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 12 फरवरी सुबह 2:52 बजे हो जाएगा. 12 फरवरी देर रात 11:39 बजे तक चतुर्थी तिथि रहेगी. चन्द्रोदय रात 9:37 बजे पर होगा.

संकष्टि चतुर्थी व्रत कथा

एक दिन माता पार्वती नदी किनारे भगवान शिव के साथ बैठी थीं. उनको चोपड़ खेलने की इच्छा हुई, लेकिन उनके अलावा कोई तीसरा नहीं था, जो खेल में हार जीत का फैसला करे. ऐसे में माता पार्वती और शिव जी ने एक मिट्टी की मूर्ति में जान फूंक दी और उसे निर्णायक की भूमिका दी.

खेल में माता पार्वती लगातार तीन से चार बार विजयी हुईं, लेकिन एक बार बालक ने गलती से माता पार्वती को हारा हुआ और भगवान शिव को विजयी घोषित कर दिया. इस पर पार्वती जी उससे क्रोधित हो गईं.

क्रोधित पार्वती जी ने उसे बालक को लंगड़ा बना दिया. उसने माता से माफी मांगी, लेकिन उन्होंने कहा कि श्राप अब वापस नहीं लिया जा सकता, पर एक उपाय है. संकष्टी के दिन यहां पर कुछ कन्याएं पूजन के लिए आती हैं, उनसे व्रत और पूजा की विधि पूछना. तुम भी वैसे ही व्रत और पूजा करना.

माता पार्वती के कहे अनुसार उसने वैसा ही किया. उसकी पूजा से प्रसन्न होकर भगवान गणेश उसके संकटों को दूर कर दिया.

चंद्रमा को अर्घ्य

गणेश चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन और चंद्र अर्घ्‍य के बिना पूरा नहीं माना जाता. इसलिए इस दिन पूजा के बाद चंद्र दर्शन किया जाता है. चंद्रमा को विधिपूर्वक अर्घ्य दिया जाता है. चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रती को भोजन ग्रहण करना चाहिए.

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