Sankashti Chaturthi Vrat 2020: संकष्टि चतुर्थी व्रत पर भगवान गणेश का पूजन किया जाता है. इस व्रत को करने से जीवन से सभी प्रकार के कष्‍ट दूर होते हैं.

फाल्गुन मास संकष्टि चतुर्थी व्रत

संकष्टी चतुर्थी हर महीने की कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है. पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं. फाल्गुन मास की संकष्टी चतुर्थी 12 फरवरी, बुधवार को है. इस दिन विघ्नहर्ता श्री गणेश जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है.

संकष्टि चतुर्थी व्रत का महत्‍व

इस दिन भगवान गणपति की आराधना करके विशेष वरदान प्राप्त किया जा सकता है और सेहत की समस्या को भी हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है.

पूजन विधि

– सुबह स्नान कर साफ और धुले कपड़े पहनें. पूजा के लिए भगवान गणेश की प्रतिमा को ईशानकोण में चौकी पर स्थापित करें. चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा पहले बिछा लें.
– गणेश जी के सामने हाथ जोड़कर पूजा और व्रत का संकल्प लें और फिर उन्हें जल, अक्षत, दूर्वा घास, लड्डू, पान, धूप आदि अर्पित करें. अक्षत और फूल लेकर गणपति से अपनी मनोकामना कहें, उसके बाद ओम ‘गं गणपतये नम:’ मंत्र बोलते हुए गणेश जी को प्रणाम करें.
– थाली या केले का पत्ता लें, इस पर आपको एक रोली से त्रिकोण बनाना है.
– त्रिकोण के अग्र भाग पर एक घी का दीपक रखें. इसी के साथ बीच में मसूर की दाल व सात लाल साबुत मिर्च को रखें.
– पूजन उपरांत चंद्रमा को शहद, चंदन, रोली मिश्रित दूध से अर्घ्य दें. पूजन के बाद लड्डू प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें.

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