Sarvapitri Amavasya 2018: अश्विन मास के कृष्णपक्ष की अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या या पितृ विसर्जन अमावस्या कहा जाता है. इस दिन उन सभी पितरों का पिंडदान किया जाता है, जिनके निधन की तिथि याद नहीं है. पितृपक्ष के 14 दिनों के दौरान यदि आप अपने पूर्वजों का श्राद्ध नहीं कर पाए हैं तो सर्वपितृ अमावस्या के दिन उनका श्राद्ध किया जा सकता है.

ऐसी मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान पितर धरती पर आते हैं और अमावस्या के दिन उनकी विदाई की जाती है. ऐसा भी कहा जाता है कि सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितर किसी भी रूप में घर पर आ सकते हैं. ऐसे में इस दिन दरवाजे पर आने वाले किसी भी व्यक्ति या जानवर का निरादर नहीं करना चाहिए.

पितृपक्ष 2018: जानिये कौन कर सकता है श्राद्ध और कौन नहीं, क्या हैं नियम

आमतौर पर पितृपक्ष के दौरान दोपहर के समय में श्राद्ध या पिंडदान किया जाता है. पर सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितृ विसर्जन शाम को ही किया जाता है. पितरों से उनके स्थान पर लौटने की प्रार्थना की जाती है.

पितृ पक्ष के दौरान चना, मसूर, सरसों का साग, सत्तू, जीरा, मूली, काला नमक, लौकी, खीरा एवं बांसी भोजन नहीं खाना चाहिए.

ऐसा माना जाता है कि पितृपक्ष के 16 दिनों के दौरान पितर धरती पर उतरते हैं और अमावस्या के दिन उनकी विदाई की जाती है. इस दिन धरती पर आए सभी पितरों की विधिवत विदाई की जाती है और उनकी आत्मा की शांति के उपाय किए जाते हैं.

सुबह स्नान करके शुद्ध मन से भोजन बनाएं. भोजन पूरी तरह से सात्विक होगा और इसमें लहसुन और प्याज का इस्तेमाल नहीं होगा. इसमें खीर-पूरी जरूर होना चाहिए.

Pitru paksha 2018: किस दिन होता है किसका श्राद्ध, देखें पूरी लिस्ट यहां

भोजन कराने और श्राद्ध करने का समय मध्यान यानी दोपहर का होना चाहिए. ब्राह्मण को भोजन कराने से पहले पंचबली जरूर दें. गाय को भोजन, कुत्ते के लिए, चींटी के लिए, कौआ के लिए और देवताओं के लिए भोजन निकाल दें. इसके बाद हवन करें. इतना करने के बाद आप ब्राह्मण को भोजन कराएं.

इसके बाद ब्राह्मण का तिलक करें और श्रद्धापूर्वक दक्षिणा देकर विदा करें. बाद में घर के सभी सदस्य एक साथ मिलकर भोजन करें. पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें.

पितरों की विदाई को लेकर एक मान्यता यह भी कि पितर अगर अपने परिवार की विदाई से प्रसन्न हुए तो अपने साथ उनकी सभी परेशानियां लेकर चले जाते हैं.

सर्वपितृ अमावस्या श्राद्ध का समय और तारीख 

तिथि – अमावस्या, 8 अक्टूबर 2018, सोमवार

श्राद्ध करने का सही समय

कुतुप मुहूर्त = 11:45 से 12:31 तक

रोहिण मुहूर्त = 12:31 से 13:17 तक

अपराह्न काल = 13:17 से 15:36 तक

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