Shabari Jayanti 2019: फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को शबरी जयंती मनाई जाती है. जो कि इस बार 24 फरवरी को पड़ रही है. ऐसा कहा जाता है शबरी भगवान राम की जन्म से भक्त थी और उनकी इसी भक्ति के लिए भगवान राम ने शबरी के झूठे बेर खाए थे. शबरी जयंती को इसीलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसी दिन भगवान राम ने इनके झूठे बेर खाए थे. Also Read - जवानी के दिनों में ऐसे दिखते थे Ramayan के राम Arun Govil, अपनी पत्नी से नहीं करते थे बात...देखें तस्वीरें

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कौन थी शबरी

शबरी का वास्तविक नाम ‘श्रमणा’ था और वह भील समुदाय की ‘शबरी’ जाति से संबंध रखती थी. शबरी के पिता भीलों के राजा थे. शबरी जब विवाह के योग्य हुई तो उसके पिता ने एक दूसरे भील कुमार से उसका विवाह पक्का किया. विवाह के दिन निकट आये. सैकड़ों बकरे-भैंसे बलिदान के लिए इकट्ठे किये गये. इस पर शबरी ने अपने पिता से पूछा- ‘ये सब जानवर क्यों इकट्ठे किये गये हैं?’ पिता ने कहा- ‘तुम्हारे विवाह के उपलक्ष में इन सब की बलि दी जायेगी. यह सुनकर बालिका शबरी का मन करुणा से भर गया. वह चकराने और सोचने लगी कि यह किस प्रकार का विवाह है, जिसमें इतने प्राणियों का वध होगा. इससे तो विवाह न करना ही अच्छा है. ऐसा सोचकर वह रात्रि में उठकर जंगल में भाग गई. शबरी का स्थान प्रमुख रामभक्तों में है. शबरी की कथा रामायण, भागवत, रामचरितमानस, सूरसागर, साकेत आदि ग्रंथों में मिलती है.

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शबरी माला देवी की होती है पूजा

शबरीमाला मंदिर में इस दिन खास तौर पर मेला लगता है एवं पूजन-अर्चना होता है. शबरी को देवी का स्थान प्राप्त हुआ एवं साथ ही साथ मोक्ष की प्राप्ति भी हुई. शबरी जंयती के दिन शबरी को देवी स्वरूप में पूजा जाता है, यह जयंती श्रद्धा एवं भक्ति द्वारा मोक्ष प्राप्ति का प्रतीक है. नारायण तो समस्त ब्रह्मांड के रखवाले हैं, सभी प्राणियों का लालन पालन भी उन्ही की कृपा से होता है. शबरी माला देवी की पूजा करने से वैसे ही भक्ति भाव की कृपा मिलती है जैसे शबरी ने भगवान राम से प्राप्त की थी. देवी का स्मरण कर भगवान राम के समस्त परिवार को ‘बेर’ फल स्वरूप भोग लगाएं. सफ़ेद चंदन से तिलक करें, शुभ ही शुभ होगा.

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