Shakambhari Navratri 2025: क्या है शाकंभरी नवरात्रि, दिसंबर में कब होगी इसकी शुरुआत? जानिए महत्व और पूजा विधि

Shakambhari Navratri 2025: क्या आप जानते हैं कि चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि के अलावा शाकंभरी नवरात्रि भी होते हैं? जो कि पौष माह में मनाई जाते हैं. आइए जानते हैं कौन है मां शाकंभरी.

Published date india.com Published: December 10, 2025 2:46 PM IST
Shakambhari Navratri 2025: क्या है शाकंभरी नवरात्रि, दिसंबर में कब होगी इसकी शुरुआत? जानिए महत्व और पूजा विधि

Shakambhari Navratri 2025: हिंदू धर्म में साल में चार बार नवरात्रि का पर्व आता है जिसमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि के अलावा दो गुप्त नवरात्रि होते हैं. जहां चैत्र और शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों का पूजन किया जाता है, वहीं गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्या की पूजा होती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन चार नवरात्रि के अलावा एक नवरात्रि पौष माह में भी आती है जिसे शाकंभरी नवरात्रि कहा जाता है? आइए जानते हैं कब शुरू होगी शाकंभरी नवरात्रि और मौन हैं मां शाकंभरी?

शाकंभरी नवरात्रि 2025 कब है?

शाकंभरी नवरात्रि मां शाकंभरी को समर्पित है और इस दौरान मां शाकंभरी का पूजन किया जाता है. शाकंभरी नवरात्रि की शुरुआत पौष माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन होती है और पूर्णिमा के दिन समाप्ति होती है. पंचांग के अनुसार इस साल शाकंभरी नवरात्रि 28 दिसंबर 2025 से शुरू होगी और 3 जनवरी 2026 को इसका समापन होगा. शाकंभरी नवरात्रि 9 नहीं, बल्कि 8 दिनों की होती है. ये नवरात्रि मुख्य रूप से राजस्थान, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश की कुछ जगहों में बहुत ही धूमधाम के साथ मनाई जाती है.

कौन हैं मां शाकंभरी?

शाकंभरी नवरात्रि में मां शाकंभरी का पूजन किया जाता है. बता दें कि मां शाकंभरी को वनस्पति की देवी कहा जाता है और यह मां भगवती का ही रूप हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार मां भगवती ने धरती को अकाल या खाद्य संकट से बचाने के लिए देवी शाकंभरी के रूप में अवतार लिया था.

शाकंभरी नवरात्रि की पूजा विधि

शाकंभरी नवरात्रि के दौरान सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और फिर मिट्टी का एक पात्र में जौ के बीज बोएं और फिर 8 दिनों तक उस पर पानी छिड़काव करें ताकि जौ अच्छे से उगे. इसके साथ ही पहले दिन कलश स्थान की जाती है. इस दौरान एक चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर उस पर गंगाजल से भरा कलश करें और कलश को लाल रंग के कपड़े से लपेंटे. इसके बाद कलश पर एक जटा वाला नारियल रखें और ध्यान रखें कि नारियल पर लाल चुनरी व कलावा जरूर बांधें. इसके बाद मां शाकंभरी को फूल, माला, अक्षत, रोली अर्पित करें. ​इस तरह 8 दिनों तक मां शाकंभरी का पूजन करें.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.

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