Shani Pradosh/Shani Tryodashi 2020: प्रदोष व्रत के दिन शिव पूजा का विशेष महत्‍व है. इस दिन भगवान शिव का प्रदोष काल में पूजन काफी पुण्‍यदायक माना गया है. Also Read - Pradosh Vrat 15 September 2020: भौम प्रदोष व्रत पर बना ये खास संयोग, जानें महत्व, पूजन विधि, शुभ मुहूर्त

साल में लगभग चार या पांच बार ऐसा होता है जब शनिवार के दिन प्रदोष व्रत आता है. इस दिन को शनि त्रयोदिशी भी कहा जाता है. इस साल शनि प्रदोष का दूसरा व्रत 21 मार्च को है. Also Read - Vrat Tyohar In September 2020: गणेश विसर्जन, पितृ पक्ष, पद्मिनी एकादशी समेत ये हैं सितंबर के व्रत त्‍योहार

शनि प्रदोष का महत्‍व

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भगवान शिव और शनिदेव की पूजा का विशेष फल प्राप्‍त होता है. शनिवार को शिव व्रत होने से इस दिन का महत्‍व और बढ़ जाता है. लोग इस व्रत का काफी इंतजार करते हैं. इस दिन भगवान शिव व शनिदेव की पूजा एवं व्रत करने से हर इच्छा पूरी होती है. शनिदेव, भगवान शिव को अपना गुरू मानते हैं. इसलिए शिव पूजन करने वालों पर शनिदेव की कुदृष्टि नहीं पड़ती. ये दिन शनि संबंधी दोष दूर करने वाला कहा गया है. प्रदोष व्रत से चंद्रमा के अशुभ प्रभावों से भी मुक्ति मिलती है.

पूजा विधि

 

ब्रह्म मुहूर्त में उठें. स्‍नान के बाद भगवान शिव का ध्‍यान करें. उनके मंत्रों का जप करें. सुबह भगवान शिव को बेलपत्र, गंगाजल, अक्षत, धूप, दीप अर्पित करें. व्रत का संकल्‍प लें. दिन पर व्रत रखें.

संध्या के समय जब सूर्य अस्त हो और रात्रि का आगमन हो, उस समय को प्रदोष काल कहते हैं. प्रदोष काल में शिव जी साक्षात शिवलिंग में प्रकट होते हैं. इसीलिए इस समय शिव का स्मरण करके उनका पूजन किया जाए तो उत्तम फल मिलता है.

प्रदोष काल में भगवान शिव व मां पार्वती की पूजा करें. संभव हो तो मंदिर जाएं. शिवजी का पूजन करें. कथा कहें. प्रसाद अर्पित करें.