Pradosh Vrat 2019 का काफी महत्‍व है. इस दिन भगवान शिव का पूजन किया जाता है. विधि-विधान से पूजन करने से हर तरह के कष्‍ट दूर होते हैं. मनोकामनाओं की पूर्ति होती है.

शनि प्रदोष व्रत
अगर प्रदोष व्रत, शनिवार को होता है तो उसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है. इस माह प्रदोष व्रत 9 नवंबर, शनिवार को है. ये साल का अंतिम शनि प्रदोष व्रत है. इसलिए इसका महत्‍व भी कहीं ज्‍यादा है.

शनि प्रदोष व्रत कथा
बहुत समय पहले की बात है. एक नगर में बहुत ही समृद्धशाली सेठ रहता था. उसके घर में धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी. कारोबार से लेकर व्यवहार में सेठ का आचरण सच्चा था. वह बहुत दयालु प्रवृति का था.

Shani Pradosh Vrat 2019: प्रदोष व्रत पर बना संयोग, तिथि, महत्‍व, व्रत विधि, शुभ मुहूर्त…

धर्म-कर्म के कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेता. इतनी ही धर्मात्मा पत्नी भी सेठ को मिली थी, जो हर कदम पर पुण्य कार्यों में सेठ जी का साथ देती थी. लेकिन कहते हैं भगवान अपने भक्तों की परीक्षा लेते हैं. उनके घर में एक ऐसा दुख था, जिसका निदान दांपत्य जीवन के कई बसंत बीतने के बाद भी नहीं हो रहा था.

दंपति को इस बात का दुख था कि विवाह के कई साल बीतने पर भी उनकी कोई संतान नहीं है. इसी दुख से पीड़ित दंपति ने तीर्थ यात्रा पर जाने का निर्णय लिया. दोनों गांव की सीमा से बाहर निकले ही थे की मार्ग में बहुत बड़े प्राचीन बरगद के नीचे एक साधु को समाधि में लीन हुआ देखा.

अब दोनों के मन में साधु का आशीर्वाद पाने की कामना जाग उठी और साधु के सामने हाथ जोड़कर बैठ गए. धीरे-धीरे समय ढ़लता गया. पूरा दिन और पूरी रात सर पर से गुजर गई पर दोनों यथावत हाथ जोड़े बैठे रहे.

प्रात:काल जब साधु समाधि से उठे और आंखे खोली तो दंपति को देखकर मंद-मंद मुस्कुराने लगे और बोले तुम्हारी पीड़ा को मैनें जान लिया है. साधु ने कहा कि एक वर्ष तक शनिवार के दिन आने वाली त्रयोदशी का उपवास रखो. तुम्हारी इच्छा पूरी होगी.

तीर्थ यात्रा से लौटने पर सेठ दंपति ने साधु की बतायी विधिनुसार शनि प्रदोष व्रत का पालन करना शुरु किया जिसके प्रताप से कालांतर में सेठानी की गोद हरी हो गई और समय आने पर सेठानी ने एक सुंदर संतान को जन्म दिया.

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