नई दिल्ली: पूर्णिमा यानी पूर्ण चंद्रमा की रात. हिंदी पंचाग के अनुसार अश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं. आज शरद पूर्णिमा की रात है. आज की रात चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है, ऐसी मान्यता है. सनातन धर्म में शरद पूर्णिमा के अनेक लाभ बताए गए हैं. जैसे इस रात चंद्रमा सोलह कला पूर्ण होता है और आज की रात पृथ्वी के सबसे निकट होता है. आज खुले आसमान में चंद्रमा की किरणें व्यक्ति को निरोगी बना देती हैं. धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ शरद पूर्णिका के कुछ चिकित्सीय और वैज्ञानिक लाभ भी बताए गए हैं. आज इस विशेष दिन हम आपको इन्हीं महत्व के बारे में बताएंगे. Also Read - Sharad Purnima 2020 Date: कब है शरद पूर्णिमा, जिस रात आसमान से होती है अमृत वर्षा

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स्वास्थ्य की दृष्टि से Also Read - शरद पूर्णिमा 2018: खुले आसमान के नीचे रखी जाती है खीर, शरद पूर्णिमा के दिन खीर कैसे बनाई जाती है, जानिये विधि

शरद पूर्णिमा की रात को स्वास्थ्य की दृष्टि से अमृतमयी माना गया है. आयुर्वेद में शरद ऋतु के बारे में कहा गया है कि इस महीने का दिन गर्म और रात ठंडी होती है. इस कारण शरीर में वात-पित्त समेत कई रोग घर कर लेते हैं.

लेकिन शरद पूर्णिमा की रात की चंद्रमा की किरणें धरती पर छिटककर औषधीय हो जाती हैं. इस दिन ठंडा दूध और चावल खाने से रोग खत्म हो जाते हैं. इसलिए आज की रात खीर बनाकर खाने की मान्यता है.

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वैज्ञानिक दृष्टि से

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी शरद पूर्णिमा की रात बहुत लाभकारी है. माना जाता है कि आज से मौसम में शीत प्रारम्भ हो जाती है. इसलिए आज के बाद से गर्म तासीर के खाद्य पदार्थों का सेवन करना शुरू कर देना चाहिए.

धार्मिक दृष्टि से

धार्मिक दृष्टि से तो शरद पूर्णिमा बहुत महत्वपूर्ण है. ऐसी मान्यता है कि आज की रात वृंदावन में भगवान कृष्ण रास रचाते हैं. शरद पूर्णिमा को कोजागरी भी कहा जाता है. आज मां लक्ष्मी की पूजा करने से धन धान्य परिपूर्ण रहता है. कई लोग आज की रात जागरण भी करते हैं.