Sharad Purnima 2019 की रात हर तरह की बीमारी को दूर करने की क्षमता रखती है. इस रात को चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से युक्त होता है.

सदियों से ये माना जा रहा है कि शरद पूर्णिमा की रात को आकाश से धरती पर अमृत बरसता है. ये चांद के कारण होता है. चांद की किरणों का तेज इस रात को खास बना देता है.

महत्‍व
हर साल अश्विन माह के शुक्लपक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है. शरद पूर्णिमा की रात का जितना महत्‍व है उतना ही दिन का भी है. इस दिन पूर्णिमा व्रत रखने से सभी तरह की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. संतान को लंबी आयु का वरदान प्राप्त होता है.

कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी किरणों के जरिये अमृत वर्षा करता है. इसलिए इस रात खीर बनाकर बाहर रखी जाती है. जिससे चंद्रमा की किरणें उस पड़ें. फिर 12 बजे के बाद इस खीर का सेवन किया जाता है.

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शरद पूर्णिमा व्रत मुहूर्त
पूर्णिमा तिथि की शुरुआत: 13 अक्‍टूबर 2019 को 12:36 बजे से पूर्णिमा आरम्भ
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 14 अक्टूबर 2019 को दोपहर 2:37 पर पूर्णिमा समाप्त

व्रत और पूजा विधि
गंगाजल डालकर स्नान करें. भगवान विष्णु या अपने ईष्ट देव को सुंदर वस्त्र, आभूषण पहनाएं. पूजन करें. मां लक्ष्मी की पूजा करें. अब व्रत रखें. व्रत में केवल फलाहार करें. शाम को मां लक्ष्मी की पूजा और आरती करें. इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें. चंद्रमा की पूजा और आरती करें. गाय के दूध से बनी खीर को आधी रात के समय भगवान को भोग लगाएं.

जब चंद्रमा आकाश के मध्य में स्थित होने पर चंद्र देव का पूजन करें तथा खीर का प्रसाद चढ़ाएं. रात को खीर से भरा बर्तन चांद के प्रकाश में ही रखें और सुबह उसका प्रसाद ग्रहण करें. इस दिन भगवान शिव-पार्वती और भगवान कार्तिकेय की भी पूजा होती है.

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