Sharad Purnima 2019 की रात को चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त होता है. इस रात को खीर बनाने और उसे चंद्रमा के प्रकाश में रखने का महत्‍व है.

पर इस दिन व्रत रखने का भी महत्‍व है. इस दिन व्रत रखने से सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी होती है.

इस दिन व्रत रखने वालों को शरद पूर्णिमा व्रत कथा कहनी और सुननी चाहिए. इस व्रत कथा का विशेष महत्‍व है. बिना व्रत कथा कहे ये व्रत संपूर्ण नहीं माना जाता.

शरद पूर्णिमा व्रत कथा
एक नगर में एक साहुकार रहता था. उसकी दो पुत्रियां थीं. साहुकार की दोनों पुत्रियों का धर्म-कर्म में ध्यान रहता और दोनों पूर्णिमा का व्रत रखती थीं. बड़ी बेटी हमेशा अपना व्रत पूरा करती और लेकिन छोटी बेटी व्रत अधूरा ही करती थी. कुछ समय के बाद दोनों की शादी हो गई.

Sharad Purnima 2019: शरद पूर्णिमा तिथि, महत्‍व, व्रत विधि, शुभ मुहूर्त…

बड़ी बेटी ने स्वस्थ संतानों को जन्म दिया, लेकिन छोटी बेटी की संताने पैदा होने के उपरांत मर जाती थीं. संतानों के मृत होने से दुखी साहुकार की छोटी बेटी पंडित के पास पहुंची. पंडित ने कहा कि तुमने पूर्णिमा का व्रत हमेशा अधूरा किया. इसलिए तुम्हारी संताने जन्म लेते ही मर जाती हैं. पूर्णिमा का पूरा व्रत विधिपूर्वक करने से तुम्हारी संतान जीवित रह सकती हैं.

उसने ऐसा ही किया. बाद में उसे एक लड़का पैदा हुआ. जो कुछ दिनों बाद ही फिर से मर गया. उसने लड़के को एक पाटे (पीढ़ा) पर लेटा कर ऊपर से कपड़ा ढंक दिया. फिर बड़ी बहन को बुलाकर लाई और बैठने के लिए वही पाटा दे दिया. बड़ी बहन जब उस पर बैठने लगी जो उसका लहंगा बच्चे का छू गया.

बच्चा लहंगा छूते ही रोने लगा. यह देखकर बड़ी बहन हैरान हो गई और कहा कि तुमने अपने पुत्र को यहां क्यों सुला दिया. अगर वह मर जाता तो मुझ पर कलंक लग जाता. क्या तुम ऐसा चाहती थी. तब छोटी बहन बोली कि यह तो पहले से मरा हुआ था. तेरे ही भाग्य से यह जीवित हो गया है. तेरे पुण्य से ही यह जीवित हुआ है.

इसके बाद दोनों बहनों ने पूरे नगर में ढिंढोरा पिटवा दिया और सभी नगर वासियों को शरद पूर्णिमा व्रत की महिमा और पूरी विधि बताई.

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