Sharad Purnima 2023 Read This Vrat Katha On The Day Of Sharad Purnima To Get Blessing Of Maa Laxmi
Sharad Purnima Vrat Katha: शरद पूर्णिमा का व्रत कर रहे हैं तो जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, मां लक्ष्मी बरसाएंगी कृपा
Sharad Purnima Vrat Katha: शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा के साथ ही मां लक्ष्मी का भी पूजन किया जाता है. कहते हैं कि यदि इस मां लक्ष्मी प्रसन्न हो जाएं तो भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं.
Sharad Purnima Vrat Katha: आश्विन माह की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा या कोजागरी पूर्णिमा कहा जाता है जो कि इस साल 28 अक्टूबर 2023, शनिवार को है. इस दिन विशेष रूप से चंद्रमा का पूजन किया जाता है क्योंकि शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी रोशनी से अमृत वर्षा होती है. चंद्रमा की यह रोशनी व्यक्ति को रोगों से मुक्ति दिलाती है और निरोगी बनाती है. वहीं शरद पूर्णिमा का दिन मां लक्ष्मी की पूजा के लिए भी बहुत खास माना गया है. इस दिन लोग मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए व्रत-उपवास करते हैं. आइए जानते हैं शरद पूर्णिमा से जुड़ी व्रत कथा.
शरद पूर्णिमा व्रत कथा
एक नगर में एक साहुकार रहता था. उसकी दो पुत्रियां थीं. साहुकार की दोनों पुत्रियों का धर्म-कर्म में ध्यान रहता और दोनों पूर्णिमा का व्रत रखती थीं. बड़ी बेटी हमेशा अपना व्रत पूरा करती और लेकिन छोटी बेटी व्रत अधूरा ही करती थी. कुछ समय के बाद दोनों की शादी हो गई.
बड़ी बेटी ने स्वस्थ संतानों को जन्म दिया, लेकिन छोटी बेटी की संताने पैदा होने के उपरांत मर जाती थीं. संतानों के मृत होने से दुखी साहुकार की छोटी बेटी पंडित के पास पहुंची. पंडित ने कहा कि तुमने पूर्णिमा का व्रत हमेशा अधूरा किया. इसलिए तुम्हारी संताने जन्म लेते ही मर जाती हैं. पूर्णिमा का पूरा व्रत विधिपूर्वक करने से तुम्हारी संतान जीवित रह सकती हैं. इसे भी पढ़ें:Kojagari Laxmi Puja 2023: विवाहित लोगों के लिए क्यों खास होती है कोजागरी पूर्णिमा? जानें शुभ मुहूर्त और महत्व
उसने ऐसा ही किया. बाद में उसे एक लड़का पैदा हुआ. जो कुछ दिनों बाद ही फिर से मर गया. उसने लड़के को एक पाटे (पीढ़ा) पर लेटा कर ऊपर से कपड़ा ढंक दिया. फिर बड़ी बहन को बुलाकर लाई और बैठने के लिए वही पाटा दे दिया. बड़ी बहन जब उस पर बैठने लगी जो उसका लहंगा बच्चे का छू गया.
बच्चा लहंगा छूते ही रोने लगा. यह देखकर बड़ी बहन हैरान हो गई और कहा कि तुमने अपने पुत्र को यहां क्यों सुला दिया. अगर वह मर जाता तो मुझ पर कलंक लग जाता. क्या तुम ऐसा चाहती थी. तब छोटी बहन बोली कि यह तो पहले से मरा हुआ था. तेरे ही भाग्य से यह जीवित हो गया है. तेरे पुण्य से ही यह जीवित हुआ है. इसके बाद दोनों बहनों ने पूरे नगर में ढिंढोरा पिटवा दिया और सभी नगर वासियों को शरद पूर्णिमा व्रत की महिमा और पूरी विधि बताई.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.
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