Sharad Purnima 2025: आज शरद पूर्णिमा के दिन रहेगा भद्रा और पंचक का अशुभ साया...ऐसे में कब रखें चंद्रमा की रोशनी में खीर?

Sharad Purnima 2025: वैदिक पंचांग के अनुसार आज यानि 6 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा मनाई जा रही है. लेकिन आज भद्रा और पंचक का साया रहेगा जिन्हें अशुभ मुहूर्त माना जाता है.

Published date india.com Updated: October 6, 2025 11:14 AM IST
Sharad Purnima 2025: आज शरद पूर्णिमा के दिन रहेगा भद्रा और पंचक का अशुभ साया...ऐसे में कब रखें चंद्रमा की रोशनी में खीर?

Sharad Purnima 2025: वैसे तो प्रत्येक माह आने वाले पूर्णिमा तिथि खास होती है लेकिन आश्विन माह की पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व माना गया है और इसे शरद पूर्णिमा कहा जाता है. कहते हैं कि इस दिन चंद्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी रोशनी से अमृत बरसता है. ऐसे में शरद पूर्णिमा की रोशनी में खीर रखने की परंपरा है और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह खीर अमृत के समान होती है. पंचांग के अनुसार आज यानि 6 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा का व्रत रखा जाएगा और इस दिन ​चंद्रमा के साथ ही मां लक्ष्मी का भी पूजन किया जाता है. लेकिन पंचांग के अनुसार शरद पूर्णिमा पर पंचक और भद्रा दोनों का साया रहेगा. ऐसे में लोग इस कंफ्यूजन में है कि पूजा किस समय की जाए और चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने का सही समय क्या है?

शरद पूर्णिमा पर पंचक और भद्रा का साया

वैदिक पंचांग के अनुसार 3 अक्टूबर से पंचक शुरू हो गए हैं और 8 अक्टूबर को समाप्त होंगे. इसके अलावा आज यानि 6 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट से लेकर रात 10 बजकर 53 मिनट तक भद्रा का भी साया रहेगा. पंचक और भद्रा दोनों ​को ही अशुभ मुहूर्त माना गया है. इसलिए इस दौरान कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य नहीं किया जाता.

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चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने का सही समय

पंचांग के अनुसार आज यानि शरद पूर्णिमा के दिन रात को 10 बजकर 38 मिनट से लेकर रात 12 बजकर 8 मिनट तक लाभ-उन्नति मुहूर्त रहेगा. लेकिन इस बीच 10 बजकर 53 मिनट तक भद्रा का भी साया रहेगा. ऐसे में रात 10 बजकर 53 मिनट के बाद ही चंद्रमा की रोशनी में खीर रखना लाभकारी होगा.

चंद्रमा की रोशनी से बरसता है अमृता

कहते हैं कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और इसलिए इसकी रोशनी से अमृत बरसता है. इसलिए इस दिन लोग खीर बनाकर उसे किसी कपड़े से ढ़ककर चंद्रमा की रोशनी में रखते हैं. इसके बाद अगले दिन भगवान को भोग लगाने के बाद प्रसाद के रूप में खीर का सेवन करते हैं.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.

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