Sharad Purnima 2018: जिस रात आसमान से चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से युक्त होकर धरती पर अमृत बरसाता है, उसी अश्विन के शुक्लपक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है. कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा का व्रत करने से सभी मनाकामनाएं पूर्ण होती हैं और संतानों को लंबी आयु का वरदान प्राप्त होता है. इस दिन खीर बनाने की परंपरा है, जिसे रात में आकाश के नीचे चंद्रमा की रौशनी में रख दिया जाता है और अगले दिन या रात 12 बजे के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस खीर में आसमान से गिरने वाला अमृत आ जाता है और उसे ग्रहण करने से शरीर रोग मुक्त हो जाता है. Also Read - शरद पूर्णिमा 2018: कोजागरी पूर्णिमा आज, चंद्रमा की किरणों से बरसेगा अमृत, दूर होंगे सभी रोग

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हिन्दू पंचांग के अनुसार शरद पूर्णिमा अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाई जाती है. शरद पूर्णिमा का हिन्दू धर्म में खास महत्व है. इस दिन विवाहित महिलाएं और अविवाहित कन्याएं भी व्रत रखती हैं. विवाहित महिलाएं संतान प्राप्ति और संतान की लंबी आयु के लिए यह व्रत रखती हैं, वहीं यह व्रत करने वाली अविवाहित कन्याओं को अच्छा वर प्राप्त होता है. दरअसल, यह माना जाता है कि शरद पूर्णिमा के साथ ही वर्षा ऋतु समाप्त हो जाती है और शरद ऋतु का शुभारंभ हो जाता है.

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कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी किरणों के जरिये अमृत की वर्षा करता है. इसलिए इस दिन आसमान बिल्कुल साफ और स्वच्छ नजर आता है.

शरद पूर्णिमा व्रत मुहूर्त: 

पूर्णिमा तिथि की शुरुआत:  23 अक्टूबर 2018 को रात्रि 22:38:01 से पूर्णिमा आरम्भ

पूर्णिमा तिथि समाप्त: 24 अक्टूबर 2018 को रात्रि 22:16:44 पर पूर्णिमा समाप्त हो रही है.

चंद्रोदय का समय: 23 अक्‍टूबर 2018 की शाम 05 बजकर 20 मिनट

शरद पूर्णिमा व्रत और पूजा विधि:

– सबसे पहले सुबह उठकर व्रत का संकल्प लें और पवित्र नदी, जलाशय या कुंड में स्नान करें. अगर आसपास जलाशय, कुंड या नदी नहीं है तो घर में ही थोड़ा सा गंगाजल पानी में डालकर स्नान कर सकते हैं.

– भगवान विष्णु या अपने ईष्ट देव को सुंदर वस्त्र, आभूषण पहनाएं. आवाहन, आसन, आचमन, वस्त्र, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, तांबूल, सुपारी और दक्षिणा आदि अर्पित कर पूजन करें.

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– इसके बाद भगवान इंद्र और मां लक्ष्मी की भी पूजा करें.

– शाम में भी मां लक्ष्मी की पूजा और आरती करें.

– इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें. चंद्रमा की पूजा और आरती करें.

– गाय के दूध से बनी खीर में घी और चीनी मिलाकर आधी रात के समय भगवान भोग लगाएं.

– जब चंद्रमा आकाश के मध्य में स्थित होने पर चंद्र देव का पूजन करें तथा खीर का प्रसाद चढ़ाएं.

– रात को खीर से भरा बर्तन चांद के प्रकाश में ही रखें और सुबह उसका प्रसाद ग्रहण करें.

– पूर्णिमा का व्रत करके कथा सुननी चाहिए. कथा से पूर्व एक लोटे में जल और गिलास में गेहूं, पत्ते के दोने में रोली व चावल रखकर कलश की वंदना करें और दक्षिणा चढ़ाएं.

– इस दिन भगवान शिव-पार्वती और भगवान कार्तिकेय की भी पूजा होती है.

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