Sharadiya Navratri 2018: शारदीय नवरात्र और दुर्गोत्सव को लेकर मूर्तिकार देवी प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं. यहां कोलकाता के मूर्तिकार पिछले 25 साल से इस काम में लगे हुए हैं. वे परम्परानुसार तवायफ के कोठे की मिट्टी मिलाकर यह प्रतिमा तैयार करते हैं. एक मान्यता के अनुसार तवायफ के कोठे की मिट्टी को सबसे शुद्ध माना गया है. वहीं कुछ मान्यताओं के अनुसार यह कहा जाता है कि मां दुर्गा ने स्वयं दर्शन देकर यह वरदान दिया था कि तवायफ के कोठे की मिट्टी का इस्तेमाल उनकी मूर्ति तैयार करने में होगी.

इस वर्ष शारदीय नवरात्र 10 अक्टूबर से प्रारंभ हो रही है. लोगों में काफी उत्साह है. दुर्गा मूर्ति स्थापना के लिए समितियों की ओर से मूर्तियों की बुकिंग भी प्रारंभ हो गई है. इस बीच हालांकि महंगाई की मार भी इन पर पड़ रही है.

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खास मिट्टी से बनती है माता की मूर्ति

दुर्गा की मूर्तियों को मूर्त रूप देने के लिए इन दिनों बंगाल से आए मूर्तिकार दिन-रात काम में जुटे हुए हैं. बंगाल के कई कलाकारों की तीन तीन पीड़ियां इसी काम में लगी हुई हैं. मां दुर्गा की प्रतिमा तैयार करने वाले कलाकारों के अनुसार मूर्ति निर्माण में हसदेव नदी के किनारे की मिट्टी का उपयोग किया जा रहा है. मूर्ति में विशेष आभा के साथ चमक बढ़ाने के लिए बंगाल से विशेष प्रकार की दूध मिट्टी का उपयोग किया जाता है. इसके अलावा परम्परानुरूप तवायफ के कोठे की मिट्टी भी वे साथ लेकर आते हैं. इस मिट्टी को प्रतिमा बनाने के लिए उपयोग की जाने वाली मिट्टी में मिलाया जाता है.

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महंगाई की मार

महंगाई की मार हर क्षेत्र में दिखने लगी है. महंगाई के कारण मूर्ति के भाव में भी 20 फीसदी का इजाफा हुआ है. इससे बाजारों में मूर्तियां साढ़े चार हजार से तीस हजार रुपये तक में बिक रही है. दूध मिट्टी 20 रुपये, मोती कलर तीन हजार रुपये व समान्य कलर दो हजार 500 रुपये प्रति किलो मिल रहा है. साथ ही मिट्टी, बांस, पैरा के भाव के साथ किराये में वृद्धि हुई है. ऐसे में मूर्तियों के भाव में बढ़ोतरी होना स्वभाविक है.

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