Shardiya Navratri 2019 की अष्‍टमी तिथि पर मां महागौरी की अराधना की जाती है.

इस दिन लोग कन्‍या पूजन करते हैं. कई लोग व्रत भी रखते हैं. इस दिन व्रत रखने से मनचाहा वरदान प्राप्‍त होता है. खासकर शादीशुदा महिलाओं के लिए इस व्रत को बेहद शुभकारी माना गया है.

मां महागौरी
भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए महागौरी ने कठोर तपस्या की थी. महागौरी की ये तपस्या इतनी कठोर थी कि देवी मां के शरीर का रंग काला पड़ गया था. इस तप के बाद भगवान शिव ने प्रसन्न होकर मां को स्वीकार किया और उन्हें गौर वर्ण प्रदान किया. इसी के बाद से मां का नाम महागौरी हो गया.

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अष्टमी व्रत विधि
दुर्गा अष्टमी के दिन विशेष रूप से मां दुर्गा के महागौरी रूप का पूजन किया जाता है. इस दिन महागौरी के रूप की तुलना शंख, चन्द्रमा या चमेली के सफेद रंग से की जाती है. इस रूप में महागौरी एक 8 वर्ष की युवा बच्चे की तरह मासूम दिखती है इस दिन वो विशेष शांति और दया बरसाती है.

इस रूप में उनके चार हाथ में से दो हाथ आशीर्वाद और वरदान देने की मुद्रा में होते हैं तथा अन्य दो हाथ में त्रिशूल और डमरू रहता है साथ ही इस दिन देवी को सफेद या हरे रंग की साड़ी में एक बैल के ऊपर विराजित या सवार होते दिखाया गया है.

दुर्गा अष्टमी के दिन भक्त सुबह जल्दी से स्नान करके देवी दुर्गा से प्रार्थना करते है और पूजन के लिए लाल फूल, लाल चन्दन, दीया, धूप इत्यादि इन सामग्रियों से पूजा करते है, और देवी को अर्पण करने के लिए विशेष रूप से नैवेद्य को तैयार किया जाता है.

देवी मंत्र
देवी के पसंद का गुलाबी फुल, केला, नारियल, पान के पत्ते, लोंग, इलायची, सूखे मेवे इत्यादी को प्रसाद के रूप में अर्पित किया जाता है और पंचामृत भी बनाया जाता है. यह पंचामृत दही, दूध, शहद, गाय के घी और चीनी इन पांचो सामग्रियों को मिलाकर बनाया जाता है, और एक वेदी बनाकर उसपर अखंड ज्योति जलाई जाती है, और हाथों में फूल, अक्षत को लेकर इस मंत्र का जाप किया जाता है जो कि निम्नलिखित है-

सर्व मंगलाय मांगल्ये, शिवे सर्वार्थ साधिके
शरण्‍ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते

इसके बाद आप उस फूल और अक्षत को माँ दुर्गा को समर्पित कर दें, फिर बाद में आप दुर्गा चालीसा का पाठ कर आरती करके पूजा करे.

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कन्‍या पूजन
अष्टमी के दिन कन्याओं को भोजन करवाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन 10 साल के कम उम्र की कन्याओं के पूजन और उन्हें भोजन कराने से शुभ फल मिलता है. ये कन्याएं मां दुर्गा का प्रतिनिधि मानी जाती हैं. आमतौर पर कन्याभोज में नौ कन्याओं को भोजन कराया जाता है लेकिन 5, 7 और 11 की संख्या भी शुभ मानी जाती है. घर बुलाकर पहले उनके पैर पूजे जाते हैं, फिर उन्हें भोजन कराकर पसंदीदा तोहफे दिए जाते हैं और उनसे आशीर्वाद लिया जाता है.

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