नई दिल्ली:   नवरात्रि दुनिया भर में मनाए जाने वाले सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले हिंदू त्योहारों में से एक है. हर साल अश्विनी मास में यह त्योहार मनाया जाता है. इस साल नौ दिवसीय शारदीय नवरात्रि 17 अक्टूबर 2020 से शुरू होगा और 25 अक्टूबर 2020 तक चलेगा. इसके बाद, लोग 26 अक्टूबर 2020 को दशहरा मनाएंगे. दशहरा वह दिन होता है जब देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था और ब्रह्मांड को उसके आतंक से मुक्त किया था. इन नौ दिनों के लिए, लोग इस उत्सव का आनंद लेते हैं और अपनी परंपराओं के अनुसार त्योहार मनाते हैं. Also Read - Happy Durga Ashtami 2020 Wishes: दुर्गा अष्‍टमी पर भेजें ये SMS, WhatsApp Messages, Images, Quotes

त्योहार को यादगार तरीके से मनाने के लिए अक्सर लोग गरबा, डांडिया और सिंदूर खेला में भाग लेते हैं. पंडाल होपिंग, जिसका अर्थ है कि देवी दुर्गा की मूर्तियों को देखने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए विभिन्न पंडालों में जाना, इस भव्य त्योहार का आनंद लेने का एक और तरीका है. लेकिन इनके अलावा, आप द्वी दुर्गा के मंदिरों में दर्शन करके भी इस त्योहार को यादगार बना सकते हैं. यूं तो देशभर में देवी दुर्गा के खई मंदिर हैं लेकिन उनमें से कुछ ही प्रसिद्ध हैं. आइए जानते हैं देवी दुर्गा के उन मंदिरों के बारे में जो काफी प्रसिद्ध हैं और वहां दर्शन कर आप अपने इस उत्सव को यादगार बना सकते हैं. Also Read - Navratri 2020: शीघ्र विवाह और धन प्राप्ति के लिए माता दुर्गा की पान के पत्तों से करें पूजा, मनोकामनाएं होंगी पूरी

वैष्णो देवी, जम्मू और कश्मीर – वैष्णो देवी मंदिर, हिन्दू मान्यता अनुसार, शक्ति को समर्पित पवित्रतम हिंदू मंदिरों में से एक है, जो भारत के जम्मू और कश्मीर में वैष्णो देवी की पहाड़ी पर स्थित है. इस धार्मिक स्थल की आराध्य देवी, वैष्णो देवी को सामान्यतः माता रानी और वैष्णवी के नाम से भी जाना जाता है.यह मंदिर, जम्मू और कश्मीर राज्य के जम्मू जिले में कटरा नगर के समीप अवस्थित है. यह उत्तरी भारत में सबसे पूजनीय पवित्र स्थलों में से एक है. मंदिर, 5,200 फ़ीट की ऊंचाई पर, कटरा से लगभग 12 किलोमीटर (7.45 मील) की दूरी पर स्थित है. हर वर्ष, लाखों तीर्थ यात्री, इस मंदिर का दर्शन करते हैं और यह भारत में तिरूमला वेंकटेश्वर मंदिर के बाद दूसरा सर्वाधिक देखा जाने वाला तीर्थस्थल है. इस मंदिर की देख-रेख श्री माता वैष्णो देवी तीर्थ मंडल नामक न्यास द्वारा की जाती है. Also Read - Navratri Puja 2020: शुभ मानी जाती हैं ये चीजें, अष्टमी- नवमी के दिन कन्याओं को करें भेंट

नैना देवी मंदिर, बिलासपुर- नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में है. यह शिवालिक पर्वत श्रेणी की पहाड़ियो पर स्थित एक भव्य मंदिर है. यह देवी के 51 शक्ति पीठों में शामिल है.वर्तमान मे उत्तर भारत की नौ देवियों मे नैना देवी का छटवां दर्शन होता है वैष्णो देवी से शुरू होने वाली नौ देवी यात्रा मे माँ चामुण्डा देवी, माँ वज्रेश्वरी देवी, माँ ज्वाला देवी, माँ चिंतपुरणी देवी, माँ नैना देवी, माँ मनसा देवी, माँ कालिका देवी, माँ शाकुम्भरी देवी सहारनपुर आदि शामिल हैं नैना देवी हिंदूओं के पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है. यह स्थान नैशनल हाईवे न. 21 से जुड़ा हुआ है. इस स्थान तक पर्यटक अपने निजी वाहनो से भी जा सकते है. मंदिर तक जाने के लिए उड़्डनखटोले, पालकी आदि की भी व्यवस्था है. यह समुद्र तल से 1100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है.

कामाख्या मंदिर, असम- कामाख्या मंदिर असम की राजधानी दिसपुर के पास गुवाहाटी से 8 किलोमीटर दूर कामाख्या में है. कामाख्या से भी १० किलोमीटर दूर नीलाचल पर्वत पर स्थित है. यह मंदिर शक्ति की देवी सती का मंदिर है. यह मंदिर एक पहाड़ी पर बना है. प्राचीन काल से सतयुगीन तीर्थ कामाख्या वर्तमान में तंत्र सिद्धि का सर्वोच्च स्थल है. पूर्वोत्तर के मुख्य द्वार कहे जाने वाले असम राज्य की राजधानी दिसपुर से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नीलांचल अथवा नीलशैल पर्वतमालाओं पर स्थित मां भगवती कामाख्या का सिद्ध शक्तिपीठ सती के इक्यावन शक्तिपीठों में सर्वोच्च स्थान रखता है.

कनक दुर्गा मंदिर, विजयवाड़ा- कनक दुर्गा मंदिर इंद्रकीलाद्री पहाड़ की चोटी पर बना है. कृष्णा नदी यहीं से होकर बहती है. यह मंदिर शहर की देवी कनक दुर्गा को समर्पित है. महाभारत के पौराणिक कथाओं के अनुसार अर्जुन को यहीं पर शक्तिशाली अस्त्र पाशुपथ की प्रप्ति हुई थी, जिसके बाद उन्होंने देवी के नाम पर मंदिर का निर्माण करवाया. एक अन्य कथा के अनुसार इस मंदिर को 12 शताब्दी में राजा पूसापति महादेव वर्मा के द्वारा बनवाया गया था, जिन्होंने आधुनिक विजयवाड़ा साम्राज्य की स्थापना की थी. वेदों की माने तो यह मंदिर स्वयंभू है, जिससे यह काफी शक्तिशाली है. सरस्वती पूजा और थेपोत्सवम यहां मानाया जाने वाला प्रमुख त्योहार है. यह मंदिर रेलवे स्टेशन और बस स्टॉप के काफी करीब है, जिससे यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है.

चामुंडेश्वरी मंदिर, मैसूर- चामुंडेश्वरी मंदिर, मैसूर के चामुंडि पर्वत पर स्थित एक प्रसिद्ध हिन्दू मंदिर है. यह चामुण्डेश्वरी या दुर्गा का मन्दिर है. मंदिर देवी चामुंडा को समर्पित है, जो देवी दुर्गा के रूपों में से एक हैं, जिन्हें महा काली, भद्रकाली और चंडी के रूप में भी जाना जाता है.

दक्षिणेश्वर मंदिर, कोलकाता- दक्षिणेश्वर काली मंदिर उत्तर कोलकाता में, बैरकपुर में, विवेकानन्द सेतु के कोलकाता छोर के निकट, हुगली नदी के किनारे स्थित एक ऐतिहासिक हिन्दू मन्दिर है. इस मंदिर की मुख्य देवी, भवतारिणी है, जो हिन्दू देवी काली माता ही है. यह कलकत्ता के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है, और कई मायनों में, कालीघाट मन्दिर के बाद, सबसे प्रसिद्ध काली मंदिर है. इसे वर्ष
1854 में जान बाजार की रानी रासमणि ने बनवाया था.

करणी माता, बीकानेर- करणी माता का मन्दिर एक प्रसिद्ध हिन्दू मन्दिर है जो राजस्थान के बीकानेर जिले में स्थित है. इसमें देवी करणी माता की मूर्ति स्थापित है. यह बीकानेर से 30 किलोमीटर दक्षिण दिशा में देशनोक में स्थित है. करणी माता का जन्म चारण कुल में हुआ यह मन्दिर चूहों का मन्दिर भी कहलाया जाता है. मन्दिर मुख्यतः काले चूहों के लिए प्रसिद्ध है. इस पवित्र मन्दिर में लगभग २०००० काले चूहे रहते हैं. मंदिर के मुख्य द्वार पर संगमरमर पर नक्काशी को भी विशेष रूप से देखने के लिए लोग यहां आते हैं. चांदी के किवाड़, सोने के छत्र और चूहों (काबा) के प्रसाद के लिए यहां रखी चांदी की बड़ी परात भी देखने लायक है.

त्रिपुर सुंदरी, उदयपुर- त्रिपुरा सुंदरी मंदिर अगरतला-सबरूम मार्ग पर उदयपुर शहर से तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. इस मंदिर का निर्माण महाराजा धन्य माणिक्य के शासनकाल में 1501 ई. के दौरान करवाया गया था. यह मंदिर भारत के 51 महापीठों में से एक है. पौराणिक कथा के अनुसार, इस स्थान पर माता सती के सीधे पैर के अंगुलियों के निशान आज भी मौजूद है. यह मंदिर राज्य के प्रमुख पयर्टन स्थलों में से एक है. हजारों की संख्या में भक्त प्रतिदिन मंदिर में माता के दर्शनों के लिए आते हैं.