Shardiya Navratri 2025: नवरात्रि में होती है सांझी माता की पूजा...घर-घर बनाई जाती है मिट्टी की मूर्ति, जानिए महत्व

Shardiya Navratri 2025: नवरात्रि का त्योहार मां दुर्गा को समर्पित है और इस दौरान भक्त माता रानी को प्रसन्न करने के लिए तरह—तरह से उनकी उपासना करते हैं. कई जगहों पर नवरात्रि में घरों में सांझी माता बनाई जाती है.

Published date india.com Published: September 24, 2025 2:45 PM IST
Shardiya Navratri 2025: नवरात्रि में होती है सांझी माता की पूजा...घर-घर बनाई जाती है मिट्टी की मूर्ति, जानिए महत्व

Shardiya Navratri 2025: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि के पर्व का विशेष महत्व माना गया है और देशभर में इसइ पर्व को बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है. इस दौरान भक्ता मां दुर्गा के 9 विभिन्न स्वरूपों का विधि-विधान से पूजन करते हैं ताकि मां दुर्गा की कृपा हमेशा बनी रहे. देश में कई जगहों पर शारदीय नवरात्रि के दौरान धर्म व लोक संस्कृति की ऐसी अनूठी मिसाल देखने को मिलती है जो कि वाकई बेहद ही खूबसूरत है. कुछ जगहों पर शारदीय नवरात्रि के दौरान घरों में सांझी माता भी बनाई जाती हैं. आप में से बहुत से लोग इससे परिचित होंगे. लेकिन फिर भी कई लोग शायद सांझी माता व उनके पूजन के बारे में नहीं जानते. इस आर्टिकल में हम आपको सांझी माता से जुड़ी अनूठी परंपरा के बारे में बताएंगे.

सांझी माता की परंपरा

शारदीय नवरात्रि में पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और मध्यप्रदेश के कुछ गांवों में सांझी पर्व मनाया जाता है. हालांकि, अब दिल्ली व एनसीआर में भी लोग इस पर्व को मनाते हैं. इस दौरान घर पर मिट्टी से सांझी माता बनाई जाती है और फिर उसे गोबर का उपयोग कर दीवार पर चिपकाया जाता है. सांझी माता की तस्वीर के साथ ही दीवार में 9 नवरात्रि, सूरज और चंदा भी बनाए जाते हैं. सांझी माता को चूड़ी, बिंदी व श्रृंगार किया जाता है. एक खूबसूरत रूप देने के बाद नवरात्रि के पहले दिन इनकी पूजा होती है.

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सभी कन्याएं मिलकर करती हैं पूजा

नवरात्रि के दौरान सांझी माता का पूजन कन्याएं व महिलाएं मिलकर करती हैं. इस दौरान 9 दिनों तक नियमानुसार उनकी पूजा-अर्चना की जाती है. लड़कियां शाम के समय सांझी माता की आरती व भजन गाती है और फिर उन्हें भोग लगाती हैं. सभी लड़कियां मिलकर एक-दूसरे के घर जाकर सांझी पूजती हैं. 9 दिनों तक सांझी माता का पूजन करने के बाद दसवें दिन यानि दशहरे के दिन उनका विसर्जन किया जाता है.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.

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