होली के बाद शीतला सप्‍तमी के व्रत का खास महत्‍व होता है. ये व्रत होली के एक सप्‍ताह बाद आता है.

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शीतला सप्‍तमी 2019
शीतला सप्‍तमी का व्रत 27 मार्च, बुधवार को है.

शीतला सप्‍तमी महत्‍व
मां शीतला को धैर्यवान लोग पसंद हैं. इसलिए दुनिया का सबसे धैर्यवान पशु गधा इनका वाहन है. इनके हाथों में झाड़ू और मटका है. झाड़ू सफाई का प्रतीक है और मां के दूसरे हाथ में रखे मटके में हजारों देवी-देवता वास करते हैं. इसलिए ऐसी मान्‍यता है कि जो भक्‍त मां शीतला को प्रसन्‍न कर देता है, उसे सभी देवी-देवताओं का आर्शीवाद मिल जाता है. इन्‍हें रोगों को दूर करने वाली माता माना जाता है.

व्रत विधि
इस उपवास में घर पर चूल्हा नहीं जलता. माता के प्रसाद के लिए व परिवार जनों के भोजन के लिए, एक दिन पहले ही सब कुछ पकाया जाता है. माता को सफाई काफी पसंद है इसलिए सब कुछ साफ-सुथरा होना बेहद आवश्‍यक है. इस दिन प्रात: काल उठें. स्नान करें. व्रत का संकल्प लेकर विधि-विधान से मां शीतला की पूजा करें. पहले दिन बने हुए यानि बासी भोजन का भोग लगाएं. साथ ही शीतला सप्तमी-अष्टमी व्रत की कथा सुनें.

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शीतला सप्तमी व्रत कथा
एक बार शीतला सप्तमी के दिन एक बुढ़िया व उसकी दो बहुओं ने व्रत रखा. उस दिन सभी को बासी भोजन ग्रहण करना था. इसलिये पहले दिन ही भोजन पका लिया गया था. लेकिन दोनों बहुओं को कुछ समय पहले ही संतान की प्राप्ति हुई थी कहीं बासी भोजन खाने से वे व उनकी संतान बिमार न हो जायें इसलिये बासी भोजन ग्रहण न कर अपनी सास के साथ माता की पूजा अर्चना के पश्चात पशओं के लिये बनाये गये भोजन के साथ अपने लिये भी रोट सेंक कर उनका चूरमा बनाकर खा लिया. जब सास ने बासी भोजन ग्रहण करने की कही तो काम का बहाना बनाकर टाल गई. उनके इस कृत्य से माता कुपित हो गई और उन दोनों के नवजात शिशु मृत मिले.

जब सास को पूरी कहानी पता चली तो उसने दोनों को घर से निकाल दिया. दोनों अपने शिशु के शवों को लिये जा रही थी कि एक बरगद के पास रूक विश्राम के लिये ठहर गई. वहीं पर ओरी व शीतला नामक दो बहनें भी थी जो अपने सर में पड़ी जूंओं से बहुत परेशान थी. दोनों बहुओं को उन पर दया आयी और उनकी मदद की सर से जूंए कम हुई तो उन्हें कुछ चैन मिला और बहुओं को आशीष दिया कि तुम्हारी गोद हरी हो जाये उन्होंने कहा कि हरी भरी गोद ही लुट गई है इस पर शीतला ने लताड़ लगाते हुए कहा कि पाप कर्म का दंड तो भुगतना ही पड़ेगा.

बहुओं ने पहचान लिया कि साक्षात माता हैं तो चरणों में पड़ गई और क्षमा याचना की, माता को भी उनके पश्चाताप करने पर दया आयी और उनके मृत बालक जीवित हो गये। तब दोनों खुशी-खुशी गांव लौट आयी. इस चमत्कार को देखकर सब हैरान रह गये। इसके बाद पूरा गांव माता को मानने लगा.

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