Sheetla Saptami 2020: शीतला सप्‍तमी पर शीतला माता का पूजन किया जाता है. मां शीतला को सौम्‍यता का प्रतीक माना गया है. इनके हाथ में झाड़ू और मटका होता है. ऐसी मान्‍यता है कि जो भक्‍त मां शीतला को प्रसन्‍न कर देता है, उसे सभी देवी-देवताओं का आर्शीवाद मिल जाता है. Also Read - Sheetla Saptami 2019: जानें कब है शीतला सप्‍तमी, महत्‍व, व्रत कथा एवं विधि...

Sheetla Saptami 2020

 

इस साल शीतला सप्‍तमी व्रत 15 मार्च, रविवार को है.

शीतला माता का स्‍वरूप

 

गधा इनका वाहन है. इनके हाथों में झाड़ू और मटका है. झाड़ू सफाई का प्रतीक है और मां के दूसरे हाथ में रखे मटके में हजारों देवी-देवता वास करते हैं. इन्‍हें रोगों को दूर करने वाली माता माना जाता है.

Sheetla Saptami Shubh Muhurat

 

सप्‍तमी तिथि आरंभ- 15 मार्च, सुबह 04:24
सप्‍तमी तिथि समाप्‍त- 16 मार्च 3:18 बजे

व्रत विधि

 

माता के प्रसाद के लिए एवं परिवार जनों के भोजन के लिए एक दिन पहले ही भोजन पकाया जाता है. माता को सफाई पसंद है, इसलिए सब कुछ साफ-सुथरा होना आवश्‍यक है. इस दिन प्रात: काल उठना चाहिए. स्नान करें. व्रत का संकल्प लेकर विधि-विधान से मां शीतला की पूजा करें. पहले दिन बने हुए यानि बासी भोजन का भोग लगाएं. साथ ही शीतला सप्तमी-अष्टमी व्रत की कथा सुनें.

व्रत कथा

 

एक बार शीतला सप्तमी के दिन एक बुढ़िया व उसकी दो बहुओं ने व्रत रखा. उस दिन सभी को बासी भोजन ग्रहण करना था. इसलिये पहले दिन ही भोजन पका लिया गया था. लेकिन दोनों बहुओं को कुछ समय पहले ही संतान की प्राप्ति हुई थी कहीं बासी भोजन खाने से वे व उनकी संतान बिमार न हो जायें इसलिये बासी भोजन ग्रहण न कर अपनी सास के साथ माता की पूजा अर्चना के पश्चात पशओं के लिये बनाये गये भोजन के साथ अपने लिये भी रोट सेंक कर उनका चूरमा बनाकर खा लिया. जब सास ने बासी भोजन ग्रहण करने की कही तो काम का बहाना बनाकर टाल गई. उनके इस कृत्य से माता कुपित हो गई और उन दोनों के नवजात शिशु मृत मिले.

जब सास को पूरी कहानी पता चली तो उसने दोनों को घर से निकाल दिया. दोनों अपने शिशु के शवों को लिये जा रही थी कि एक बरगद के पास रूक विश्राम के लिये ठहर गई. वहीं पर ओरी व शीतला नामक दो बहनें भी थी जो अपने सर में पड़ी जूंओं से बहुत परेशान थी. दोनों बहुओं को उन पर दया आयी और उनकी मदद की सर से जूंए कम हुई तो उन्हें कुछ चैन मिला और बहुओं को आशीष दिया कि तुम्हारी गोद हरी हो जाये उन्होंने कहा कि हरी भरी गोद ही लुट गई है इस पर शीतला ने लताड़ लगाते हुए कहा कि पाप कर्म का दंड तो भुगतना ही पड़ेगा.

बहुओं ने पहचान लिया कि साक्षात माता हैं तो चरणों में पड़ गई और क्षमा याचना की, माता को भी उनके पश्चाताप करने पर दया आयी और उनके मृत बालक जीवित हो गये। तब दोनों खुशी-खुशी गांव लौट आयी. इस चमत्कार को देखकर सब हैरान रह गये। इसके बाद पूरा गांव माता को मानने लगा.