देवघर (झारखंड). झारखंड के देवघर स्थित द्वादश ज्योतिर्लिगों में शामिल कामना लिंग से प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम के महाप्रसाद से न केवल देवघर की, बल्कि पूरे झारखंड की ब्रांडिंग की जाएगी. देवघर के उपायुक्त (जिलाधिकारी) राहुल कुमार सिन्हा ने कहा, “बाबा के प्रसाद से झारखंड की ब्रांडिंग की जाएगी. इसके तहत बाबा के महाप्रसाद की खूबसूरत पैकेजिंग कर दिल्ली स्थित देश के सभी राज्यों के भवनों में भेजा जाएगा. इन भवनों में आने वाले लोग इस महाप्रसासद को ग्रहण कर सकेंगे और बाबा बैद्यनाथधाम की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे.” उन्होंने बताया, “इस महाप्रसाद में पेड़ा, इलायची दाना, कच्चा सूत (बद्धी), सिंदूर सहित वे सभी सामग्री रहेंगी, जिसकी मान्यता बाबा के प्रसाद के रूप में है.”

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उपायुक्त ने कहा, “सावन महीना प्रारंभ होने के एक दिन पहले यानी 16 जुलाई से यहां स्पर्श पूजा बंद कर दी जाएगी और 17 जुलाई से अरघा लगा दिया जाएगा, जिसमें आने वाले कांवड़िये जलाभिषेक कर सकेंगे, जो सीधे मंदिर तक पहुंचेगा. इस बार तीन अरघा लगाए जा रहे हैं.” इस बीच, मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बैद्यनाथ-बासुकीनाथ श्राइन बोर्ड की मंगलवार की बैठक में कुंभ मेला की तर्ज पर श्रावणी मेला में स्वच्छता और विनम्रता के सूत्रवाक्य को कांवड़ियों की सेवा का मूलमंत्र बनाने का आह्वान किया.

मुख्यमंत्री मंगलवार को बाबा दरबार पहुंचे और उन्होंने पूजा-अर्चना की. इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा, “हम सौभाग्यशाली हैं कि हमारे पास बाबाधाम देवघर और बासुकीनाथ धाम जैसे विश्वप्रसिद्ध तीर्थ स्थल हैं. हम इसे सांस्कृतिक टूरिज्म हब बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं. श्रावणी मेला जैसे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों से एक भारत श्रेष्ठ भारत का निर्माण होगा.” झारखंड के पर्यटन विभाग के मंत्री अमर बाउरी ने श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि “इस साल ऐसी व्यवस्था करने की कोशिश की जा रह है कि आने वाले श्रद्धालु अपने साथ एक सुखद अनुभूति लेकर लौटें. श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए टेंट सिटी का निर्माण करवाया गया है.”

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झारखंड स्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थल बैद्यनाथ धाम भगवान शंकर के द्वादश ज्योतिर्लिगों में नौवां है. यह ज्योतिर्लिग सभी ज्योतिर्लिगों में सर्वाधिक महिमामंडित माना जाता है. यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु आते हैं, परंतु भगवान शिव के सबसे प्रिय महीने सावन में यहां उनके भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ता है. प्रतिदिन यहां करीब एक लाख भक्त ज्योर्तिलिंग पर जलाभिषेक करते हैं. इनकी संख्या सोमवार के दिन और बढ़ जाती है. शिव भक्त सुल्तानगंज से उत्तर वाहिनी गंगा से जलभर कर 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर यहां पहुंचते हैं और भगवान का जलाभिषेक करते हैं.