नई दिल्ली. भगवान शंकर का सबसे प्यारा मास, सावन आने वाला है. इसको लेकर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक झारखंड के देवघर में सालाना श्रावणी मेले की तैयारियां शुरू हो गई हैं. राज्य सरकार इस बार विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेले को श्रद्धालुओं के लिए खास बनाना चाहती है. इसके लिए झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास ने अधिकारियों के साथ कल बैठक की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए. सीएम रघुबर दास ने कहा कि श्रावणी मेले के दौरान देशभर के लाखों श्रद्धालु देवघर पहुंचते हैं. इसलिए मेले के इंतजाम में किसी तरह की कोताही न बरती जाए. सीएम ने कहा कि अधिकारी इस बात का ख्याल रखें कि किसी भी कांवड़िए को देवघर आने में परेशानी न हो. बता दें कि सावन महीने में देवघर स्थित भगवान शंकर के ज्योतिर्लिंग पर गंगा जल चढ़ाने के लिए हर साल लाखों की तादाद में श्रद्धालु पहुंचते हैं. चूंकि ये श्रद्धालु गंगा का पवित्र जल अपने कांधे पर रखे कांवड़ में लाते हैं, इसलिए इन्हें कांवड़िया कहा जाता है.

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सीएम अपने कार्यालय से करेंगे निगरानी
सीएम रघुवर दास ने गुरुवार को बाबा वैद्यनाथ धाम वासुकीनाथ तीर्थ क्षेत्र विकास प्राधिकार की समीक्षा बैठक की. इसमें अधिकारियों को निर्देश देते हुए सीएम ने कहा कि श्रावणी मेले के दौरान देवघर में विश्वस्तरीय व्यवस्थाएं होनी चाहिए. ऐसे इंतजाम करिए कि श्रद्धालुओं को लगे कि वे देवभूमि में प्रवेश कर रहे हैं. कांवड़ियों को पीने का साफ पानी, बिजली, साफ-सफाई आदि में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए. सीएम ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि मेले में इंटीग्रेटेड मॉनिटरिंग सिस्टम की व्यवस्था करें. मॉनिटरिंग का पुख्ता सिस्टम बनाएं. मेले का लाइव प्रसारण प्रदेश की राजधानी रांची स्थित सीएम कार्यालय में भी किया जाएगा. उन्होंने मेले के संचालन में अधिक से अधिक जन-भागीदारी सुनिश्चित करने का आदेश दिया.

मेले के प्रचार-प्रसार पर भी हो ध्यान
झारखंड सरकार देवघर में लगने वाले सालाना श्रावणी मेले के प्रचार-प्रसार के लिए भी गंभीरता से काम करेगी. सीएम रघुबर दास ने इसके लिए दिशा-निर्देश दिए हैं. उन्होंने समीक्षा बैठक में अधिकारियों से कहा कि श्रावणी मेले का प्रचार-प्रसार राष्ट्रीय स्तर पर किया जाए. इसके लिए जो प्रचार सामग्री बनेगी, उसका कंटेंट स्पष्ट और कम शब्दों में हो, ताकि इससे प्रदेश के बाहर के लोगों को भी इस मेले के महत्व का पता चल सके. उन्होंने श्रावणी मेले के दौरान शिल्पग्राम हैंडीक्राफ्ट मेला लगाने का भी आदेश दिया. हैंडीक्राफ्ट मेले में झारखंड में बने हस्तशिल्प उत्पादों के स्टॉल लगेंगे. सीएम ने इसके अलावा कांवड़ियों के लिए हेल्थ चेकअप शिविर लगाने, मानसरोवर का विकास करने जैसे निर्देश भी दिए.

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100 किमी पैदल चल करते हैं बाबा का अभिषेक
देवघर में श्रावणी मेले के दौरान लाखों की तादाद में आने वाले कांवड़ियों की कहानी, भोलेनाथ की भक्ति और आस्था की अनूठी कहानी है. बाबा वैद्यनाथ का अभिषेक करने के लिए ये कांवड़िए करीब 100 किलोमीटर दूर बिहार के सुल्तानगंज स्थित अजगैबीनाथ धाम से पैदल ही गंगा जल लाते हैं. ऐसी मान्यता है कि सुल्तानगंज से लाए गए गंगा जल को देवघर में स्थित बाबा वैद्यनाथ के शिवलिंग पर चढ़ाने से श्रद्धालुओं की इच्छा पूरी होती है. देवघर में लगने वाले श्रावणी मेले के इसी महत्व के कारण सावन के महीने में झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल समेत देश के कई राज्यों से श्रद्धालु बाबा वैद्यनाथ का दर्शन करने पहुंचते हैं. यही नहीं, पड़ोसी देश नेपाल और श्रीलंका के श्रद्धालु भी सावन के महीने में भगवान भोलेनाथ का दर्शनलाभ उठाने पहुंचते हैं.

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रामायण के रावण से जुड़ी है वैद्यनाथ की कहानी
देवघर में स्थित देवाधिदेव महादेव को रावणेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है. इसके पीछे की कहानी रामायण में वर्णित लंका के राजा रावण से जुड़ी है. कहा जाता है कि रावण ने एक बार तपस्या करके शिव को प्रसन्न कर लिया. महादेव ने प्रसन्न होकर वरदान मांगने को कहा तो रावण ने उनसे कैलाश छोड़कर, लंका चलने की मांग रख दी. भक्त की बात पर महादेव तैयार तो हो गए, लेकिन शर्त यह रख दी कि रास्ते में उन्हें कहीं भी जमीन पर न रखा जाए. रावण मान गया. देवघर के करीब आने पर रावण को लघुशंका की इच्छा हुई. लेकिन शर्त के कारण उसने एक चरवाहे को महादेव को उठाए रखने को कहा. कहा जाता है कि रावण को लघुशंका से लौटने में देरी होता देख चरवाहा ने महादेव को जमीन पर रख दिया और वहां से चला गया. इतने में रावण पहुंचा तो शिव ने चलने से इनकार कर दिया. काफी मनाने के बाद भी जब महादेव नहीं माने तो रावण उन्हें वहीं छोड़कर चला गया. कालक्रमेण बैजू नामक चरवाहे ने शिव के लिंग स्वरूप को देखकर पूजा-आराधना शुरू कर दी. तभी से यह स्थान बैजनाथ या वैद्यनाथ और रावणेश्वर महादेव के रूप में प्रसिद्ध है.

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