Sawan 2018: देखा जाए तो श्रावण मास का हर दिन बेहद खास होता है. सोमवार को जहां भक्त भोलेनाथ की विधिवत पूजन करते हैं, वहीं श्रावण मास के मंगलवार को महिलाएं मंगला गौरी का व्रत रखती हैं. यानी इस पूरे महीने सोमवार के साथ-साथ मंगलवार का भी महत्व है. Also Read - Sawan 2nd Somvar Vrat date and Vidhi: नवमी तिथि के साथ आ रहा है श्रावण का दूसरा सोमवार, जानें, महत्व और पूजन विधि

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आमतौर पर मंगलवार को बजरंगबली की पूजा होती है, वहीं सावन महीने के हर मंगलवार को मां पार्वती की पूजा की जाती है. स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु के लिए यह व्रत रखती हैं. इसके साथ ही जिन महिलाओं संतान सुख नहीं प्राप्त है, वह भी संतान प्राप्ति के लिये यह व्रत रखती हैं.

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व्रत कथा:

एक नगर में एक व्यापारी अपनी पत्नी के साथ सुखी से जीवन जी रहा था. उसे धन दौलत की कोई कमी नहीं थी. लेकिन उसकी कोई संतान नहीं थी. इसलिए सारी सुख सुविधाएं होते हुए थी दोनों पति पत्नी खुश नहीं रहते थे.

खूब पूर्जा अर्चना करने के बाद उन्हें पुत्र का वरदान प्राप्त हुआ. लेकिन ज्योतिषियों ने कहा कि वह अल्पायु है और 17 साल का होते ही उसकी मृत्यु हो जाएगी. इस बात को जानने के बाद पति पत्नी और भी दुखी हो गए. लेकिन उन्होंने इसे ही अपना और पुत्र का भाग्य मान लिया.

कुछ समय बाद उन्होंने अपने बेटे की शादी एक सुंदर और संस्करी कन्या से कर दी. वह कन्या सदैव मंगला गौरी का व्रत करती और मां पार्वती की विधिवत पूजन करती थी. इस व्रत के प्रभाव से उत्पन्न कन्या को अखंड सौभाग्यवती होने का आशिर्वाद प्राप्त था. इसके परिणाम स्वरुप सेठ के पुत्र की मृत्‍यु टल गई और उसे दीर्घायु प्राप्त हुई.

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व्रत विधि:

सूर्य उगने से पहले उठें और नित्य कर्मों से निवृत्त होकर साफ या नये कपड़े पहनें.

इस व्रत में एक ही समय अन्न ग्रहण किया जाता है.

एक लकड़ी के तख्त पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर मां मंगला गौरी यानी मां पार्वती की प्रतिमा या चित्र रखें.

इस मंत्र का उच्चारण करें और व्रत का संकल्प लें. ‘मम पुत्रापौत्रासौभाग्यवृद्धये श्रीमंगलागौरीप्रीत्यर्थं पंचवर्षपर्यन्तं मंगलागौरीव्रतमहं करिष्ये’

फिर उस प्रतिमा के सामने एक घी का दीपक (आटे से बनाया हुआ) जलाएं, दीपक ऐसा हो, जिसमें सोलह बत्तियां लगाई जा सकें.

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इसके बाद इस मंत्र को पढ़ें:

‘कुंकुमागुरुलिप्तांगा सर्वाभरणभूषिताम्।

नीलकण्ठप्रियां गौरीं वन्देहं मंगलाह्वयाम्..।।

इस मंत्र को बोलते हुए माता मंगला गौरी का षोडशोपचार पूजन किया जाता है. मां को जो भी चढ़ाएं वह 16 की संख्या में हो. जैसे 16 मालाएं, लौंग, सुपारी, इलायची, फल, पान, लड्डू, सुहाग क‍ी सामग्री, 16 चुडि़यां तथा मिठाई चढ़ाई जाती है. इसके अलावा 5 प्रकार के सूखे मेवे, 7 प्रकार के अनाज-धान्य (जिसमें गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर) आदि होना चाहिए. पूजन के बाद मंगला गौरी की कथा सुनी जाती है.

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