नई दिल्ली. सावन का महीना देवाधिदेव भगवान शंकर की आराधना के लिए जाना जाता है. यह मास भगवान शंकर को बहुत प्यारा है. इसलिए भोले के भक्त कांवड़िए इस मास में देवाधिदेव भगवान के प्रतीक लिंग स्वरूप पर जलाभिषेक करते हैं. भगवान भोलेनाथ की आराधना वैसे तो देश में स्थित सभी 12 ज्योतिर्लिंगों में साल के सभी महीनों में की जाती है. लेकिन सावन के महीने में झारखंड के देवघर में स्थित बाबा वैद्यनाथ की महिमा इन दिनों में ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जाती है. सावन महीने में यहां विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेला लगता है, जिसमें हर साल लाखों की तादाद में कांवड़िए पहुंचते हैं. इस साल 27 जुलाई से 28 अगस्त तक यह मेला लगेगा. देवघर को बाबाधाम के नाम से भी जाना जाता है और यहां स्थित भगवान शंकर की रावणेश्वर महादेव या मनोकामना महादेव के रूप में भी मान्यता है. अगर आप भी भगवान शंकर के भक्त हैं तो इस सावन में देवघर जरूर जाएं और अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए भगवान शंकर के ज्योतिर्लिंग पर जल चढ़ाएं.

कैसे पहुंच सकते हैं देवघर
देवघर, बिहार और बंगाल दोनों की सीमाओं से सटा हुआ झारखंड का जिला है. देवघर तक आप ट्रेन, बस और अपने वाहन से आसानी से पहुंच सकते हैं. देवघर में एयरपोर्ट है, लेकिन यहां से अभी कॉमर्शियल फ्लाइट के ऑपरेशंस शुरू नहीं हुए हैं. इसलिए बेहतर है कि आप ट्रेन से ही जाएं. वैसे दूरदराज शहरों से आने वाले लोग पटना और रांची एयरपोर्ट तक फ्लाइट से आ सकते हैं. इसके बाद निजी वाहन, बस या ट्रेन से देवघर पहुंच सकेंगे. वैसे तो देवघर तक के लिए भी कई शहरों से सीधी ट्रेन सेवा है, लेकिन यहां से 10 किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित जसीडीह स्टेशन यात्रियों के लिए सुविधाजनक है. पटना-हावड़ा रेलखंड पर स्थित जसीडीह, दिल्ली और मुंबई समेत देश के कई प्रमुख शहरों से रेल सेवा के जरिए जुड़ा हुआ है. आप दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, पंजाब के शहरों या दक्षिणी राज्यों से भी देवघर आना चाहते हों तो जसीडीह आना आसान है. यहां से देवघर के लिए ट्रेन, टैक्सी और लोकल बस सर्विस उपलब्ध है.

Shraavana 2018: महादेव को प्यारा है सावन, देवघर में शुरू हुई श्रावणी मेले की तैयारी

Shraavana 2018: महादेव को प्यारा है सावन, देवघर में शुरू हुई श्रावणी मेले की तैयारी

देवघर में कहां ठहरें
देवघर में सालोंभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है. इसलिए यहां आकर ठहरने के लिए ज्यादा परेशानी नहीं उठानी पड़ती. हां, श्रावणी मेले के दौरान चूंकि भीड़ ज्यादा होती है, इसलिए प्री-बुकिंग का ऑप्शन जरूर तलाशना चाहिए. देवघर में बड़ी तादाद में धर्मशाला हैं. वहीं, कई महादेव मंदिर के पुजारी व पंडों ने भी रेस्ट-हाउस बना रखे हैं. इसके अलावा सभी प्राइस-रेंज के होटल भी हैं. श्रावणी मेले के दौरान अगर आप देवघर आने की योजना बना रहे हैं, तो बेहतर होगा कि होटलों की प्री-बुकिंग ऑप्शन का इस्तेमाल करें. वहीं, अगर आप देवघर आते रहे हैं और यहां की धर्मशालाओं के संचालकों से परिचित हैं, तो श्रावणी मेले में आने से पहले उन्हें अपने आने की तिथियों और कमरों की जरूरत की जानकारी दे दें. मेले के दौरान यह शहर 24 घंटे तीर्थयात्रियों से भरा रहता है. ऐसे में आपको यहां पहुंचने के बाद किसी तरह की तकलीफ हो, इसके लिए पहले से तैयारी कर लेना बेहतर है.

देवघर स्थित ज्योतिर्लिंग को मनोकामना महादेव के नाम से भी जाना जाता है.

देवघर स्थित ज्योतिर्लिंग को मनोकामना महादेव के नाम से भी जाना जाता है.

 

मेले के अलावा भी रमणीक है देवघर
देवघर सिर्फ श्रद्धा और आस्था के लिए ही नहीं, बल्कि घूमने के लिए भी बेहद शानदार जगह है. खासकर प्रकृति-प्रेमियों के लिए देवघर और आसपास का इलाका स्वर्ग सरीखा है. देवघर के आसपास की पहाड़ियां, यहां की हरियाली, प्रदूषण रहित वातावरण, भक्तिमय माहौल, यह सबकुछ आपको शानदार अनुभव देगा. देवघर के पास 50 किलोमीटर के दायरे में बासुकीनाथ महादेव का मंदिर है. यहीं पर त्रिकूटी पहाड़ है, जहां सालोंभर हजारों की तादाद में पर्यटक आते हैं. देवघर आने वाले श्रद्धालु वैसे तो बासुकीनाथ महादेव का दर्शन करने जाते ही हैं. इस बहाने वे त्रिकुटी पहाड़ की सैर करना नहीं भूलते. वहीं, देवघर में मौजूद तपोवन, नौलखा मंदिर जैसे भी कई स्थल हैं, जो श्रद्धालु और पर्यटक दोनों के लिहाज से घूमने लायक स्थल हैं. अगर इस सावन मास में आप देवघर आने का प्लान बना रहे हों तो झारखंड के इस देवस्थल और इसके आसपास की सैर करना मत भूलिएगा.

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