आने वाले दो दिन के बाद यानि 17 अगस्त को सिंह संक्रांति हैं, इस दिन सूर्य कर्क से सिंह राशी में प्रवेश करता है. हिंदू केलेंडर के अनुसार पूरे साल भी 12 संक्रांतियां ऐसी होती है जिसमें ये संयोग बनता है. वहीं, सूर्य जब राशि बदलता है तो उसे संक्रांति कहा जाता है. मान्यताएं हैं कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करना होता है और अपनी इच्छा अनुसार दान-पुण्य करने की भी परंपरा है. Also Read - Things Not To Do On A Sunday: रविवार को इन कामों से बनार रखें दूरी, नहीं तो होगा भारी नुकसान

हालांकी की कोरोना की वजह से नदियों में स्नान करना नहीं हो पाएगा, ऐसे में अगर आप इस संक्रांति को मनाते हैं और इसकी पूजा करते हैं तो इस दिन घर में रखे गंगाजल से ही स्नान कर लें. स्नान करते वक्त पवित्र नदियों औ तीर्थ स्थानों के साथ भगवान सूर्य का ध्यान जरुर करें. साथ ही घर के आसपास जितने भी जरूरतमंद लोग मिलें उन्हें अनाज औऱ जरुर सामान जरुर दान करें.

पांच देवों में से एक देव भगवान सूर्य को माना जाता है, किसी भी शुभ कार्य की शुरूआत के लिए गणेशजी, शिवजी, विष्णुजी, देवी दुर्गा और भगावन सूर्य की पूजा की जाती है. जिस दिन आप सूर्य की पूजा करें ध्यान ने सूर्य को जल चढ़ाते वक्त तांबे के लेटे से ही उन्हें जल चढ़ाएं. इसक इसके साथ ही जल चढ़ाते समय ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जाप करते रहना चाहिए. जिस दिन आप सूर्य की पूजा कर रहे हों औऱ मौसम खराब हो जाए तो ऐसे में अपने घर में रखी सूर्य प्रतिमा या सूर्य यंत्र की पूजा कर लें.

ऐसे करें सूर्य की पूजा
पूजा करते वक्त ध्यान रहे की आपको पास शुद्ध गाय का दूध औऱ साथ में गंगाजल हो, पूजा शुरु होने से पहले पूजा में पुष्प, चावल, कुमकुम सहित अन्य पूजन सामग्री अपने पास रख ले. भगवान सूर्य की मूर्ति की पूजा पूरे विधिपूर्वक करें और साथ में पूजा में जल चढ़ाने के लिए तांबे के लोटे का इस्तेमाल करें.

सूर्य मंत्र- ऊँ सूर्याय नम: का जाप करते रहें। मंत्र जाप कम से कम 108 बार करें।

घर के पास जो गरीब लोग हैं उन्हें खान का सामान चाल-चावल जैसी चीजे दान करें आप चाहें तो वस्त भी दान कर सकते हैं. साथ ही गरीबों को मन से भोजन कराएं, भगान सूर्य प्रसन्न हो जाएंगे.