नई दिल्ली: शुक्ल पक्ष की नवमी को सीता जयंती के रूप में मनाया जाता है. सीता नवमी को देवी सीता के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. इस दिन को सीता जयंती के रूप में भी जाना जाता है. विवाहित महिलाएं सीता नवमी के दिन उपवास रखती हैं और अपने पतियों की लंबी उम्र की कामना करती हैं. सीता जयंती वैशाख मास के शुक्ल पक्ष के दौरान नवमी तिथि को मनाई जाती है. ऐसा माना जाता है कि देवी सीता का जन्म मंगलवार को पुष्य नक्षत्र में हुआ था. देवी सीता का विवाह भगवान राम से हुआ था जिनका जन्म चैत्र माह के शुक्ल पक्ष के दौरान नवमी तिथि को हुआ था. हिंदू कैलेंडर में सीता जयंती रामनवमी के एक महीने बाद आती है.Also Read - Vrat Tyohar In MAY 2020: सीता नवमी, प्रदोष व्रत, बुद्ध पूर्णिमा समेत मई के व्रत त्‍योहार

माता सीता को जानकी के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि वे मिथिला के राजा जनक की गोद ली हुई बेटी थीं. इसलिए इस दिन को जानकी नवमी के नाम से भी जाना जाता है. हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब राजा जनक यज्ञ करने के लिए भूमि की जुताई कर रहे थे, तो उन्हें स्वर्ण कलश में एक बच्ची मिली. इसलिए राजा जनक ने उस बच्ची का नाम सीता रखा.

सीता नवमी मुहूर्त (sita navami muhurat)

सीता नवमी शनिवार, मई 2, 2020 को

सीता नवमी मध्याह्न मुहूर्त – 10:58 से 13:38

अवधि –
02 घंटे 40 मिनट

सीता नवमी मध्याह्न का क्षण – 00: 18
नवमी तिथि प्रारम्भ – 01 मई, 2020 को 13:26 बजे
नवमी तिथि समाप्त – 02 मई, 2020 को रात 11:35 बजे

सीता नवमी पर पूजा की विधि
अष्टमी को स्नान करने के बाद जमीन को लीपकर अथवा स्वच्छ जल से धोकर आम के पत्तों और फूल से मंडप बनाएं. इसमें एक चौकी रखें, फिर लाल अथवा पीला कपड़ा बिछाएं. इस चौकी को फूलों से सजाएं. इसके बाद भगवान राम और माता सीता की प्रतिमा स्थापित करें. फिर श्रीराम और माता सीता के नाम का संकल्प पढ़कर विधि-विधान से पूजन करें.