Skanda Shasti 2020: आज स्‍कंद षष्‍ठी है. इस दिन भगवान शिव-मां पार्वती के पुत्र, भगवान कार्तिकेय की पूजा की जाती है. इनकी पूजा से जीवन में हर तरह की कठिनाइंया दूर होती हैं और सुख की प्राप्ति होती है.

स्कंद षष्ठी

स्कंद षष्ठी साल में 12 आती है. हर महीने में एक. त्योहार दक्षिण भारत में प्रमुख रूप से मनाया जाता है. माना जाता है कि इस तिथि को कुमार कार्तिकेय ने तारकासुर नामक राक्षस का वध किया था.

दरअसल मां दुर्गा के 5वें स्वरूप स्कंदमाता को भगवान कार्तिकेय की माता के रूप में जाना जाता है. इनकी पूजा दोनों नवरात्रियों में की जाती है. इस षष्ठी को चम्पा षष्ठी भी कहते हैं, क्योंकि भगवान कार्तिकेय को सुब्रह्मण्यम के नाम भी पुकारते हैं और उनका प्रिय पुष्प चम्पा है. संतान के कष्टों को कम करने और उसके सुख की कामना से ये व्रत किया जाता है.

पूजा विधि

सुबह जल्‍दी उठें. स्‍नान आदि कर मंदिर जाएं. भगवान कार्तिकेय की पूजा करें. उन्हें बादाम और नारियल से बनीं मिठाइयां चढ़ाएं. भगवान कार्तिकेय की पूजा दीपक, गहनों, कपड़ों से की जाती है.

व्रत के नियम

इस षष्‍ठी पर व्रत रखें तो भगवान शिव और मां पार्वती का पूजन करें. इसमें स्कंद देव (कार्तिकेय) की स्थापना और पूजा होती है. अखंड दीपक जलाए जाते हैं. भगवान को भोग लगाया जाता है. इस दिन मांस, शराब, प्याज, लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए. ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.

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