नई दिल्ली: देवस्नान पूर्णिमा हिंदूओं का सबसे पवित्र त्योहार होता है. इसे स्नान यात्रा के नाम से भी जाना जाता है. देव स्नान पूर्णिमा 5 जून यानी आज है और इस दिन सभी देवताओं को स्नान बेदी में स्नान कराया जाता है.यह दिन भगवान जगन्नाथ का एक विशेष स्नान समारोह है, जिसे ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को भगवान जगन्ननाथ के जन्मदिन के मौके पर मनाया जाता है. देवस्नान पूर्णिमा हिंदू कैलेंडर के अनुसार साल का पहला त्योहार है, जब देवताओं जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा, सुदर्शन और मदनमोहन को पुरी के जग्गनाथ मंदिर से बाहर लाया जाता है और स्नाना बेदी में ले जाया जाता है.

देवस्नान पूर्णिमा 2020 समय
देवस्नान पूर्णिमा को ज्येष्ठ पूर्णिमा (पूर्णिमा के दिन) में मनाया जाता है. देवस्नान पूर्णिमा 2020 आज, 5 जून को मनाया जाता है. शुभ त्योहार के लिए पूर्णिमा तिथि आज सुबह 03:16 बजे शुरू हुई है और कल 6 जून को 12:42 बजे समाप्त होगी.

देवस्नान पूर्णिमा महत्व

देवस्नान पूर्णिमा को भगवान जगन्नाथ की जयंती के रूप में मनाया जाता है. भगवान जगन्नाथ के भक्तों के लिए इस दिन का खास महत्व है. इसके साथ ही उड़ीसा के पुरी में इस दिन को भव्य त्योहार के रूप में मनाया जाता है. इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा, सुदर्शन और मदनमोहन की मूर्तियों को मंदिर से मबाहर निकालकर स्नान बेदी में ले जाया जाता है. इसके बाद सभी देवताओं को औपचारिक रूप से स्नान कराया जाता है और सजाया जाता है. कुछ मान्यताओं के मुताबिक, अनुष्ठानिक स्नाना यात्रा के दौरान सभी देवताओं को बुखार हो जाता है जिस वजह से उन्हें एकांत कारावास में 15 दिन के लिए रखा जाता है. इसके बाद भक्तों को उनके दर्शन तफभी कराए जाते हैं जब सभी देवता ठीक हो जाते हैं. भक्तों का मानना है कि भगवान के दर्शन मात्र से ही व्यक्ति के सभी दुख खत्म हो जाते हैं.

सोने के कुएं से स्नान

स्नान पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र, और बहन सुभद्रा को मंदिर के गर्भगृह से निकालकर स्नान मंडप में लाया जाता है. स्नान मंडप परिसर में बने सोने के कुएं से स्नान के लिए 108 घड़ा जल निकाला जाता है. इन सभी घड़ों के जल को मंदिर के पुजारी हल्दी जव, अक्षत, चंदन, पुष्प और सुगंध से पवित्र करते हैं. इसके बाद इन घड़ों को स्नान मंडप में लाकर विधि विधान से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का स्नान संपन्न कराया जाता है जिसे जलाभिषेक कहते हैं.