Somnath Swabhiman Parv: सोमनाथ मंदिर को क्यों कहते हैं पहला ज्योतिर्लिंग? जानिए पौराणिक कथा और धार्मिक रहस्य

Somnath Swabhiman Parv: हिंदू धर्म शास्त्रों में 12 ज्योतिर्लिंग बताए गए हैं और पहला ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर सोमनाथ पहला ज्योतिर्लिंग कैसे बना?

Published date india.com Published: January 8, 2026 3:36 PM IST
Somnath Swabhiman Parv: सोमनाथ मंदिर को क्यों कहते हैं पहला ज्योतिर्लिंग? जानिए पौराणिक कथा और धार्मिक रहस्य

Somnath Swabhiman Parv: साल 1026 ई. में हुए विदेशी हमले के बाद सोमनाथ मंदिर का फिर से निर्माण किया गया और इस निर्माण को साल 2026 में 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं. देश के लिए यह एक बेहद ही एतिहासिक अवसर है और इस मौके पर सोमनाथ स्वाभिमान पर्व आयोजित किया जा रहा है. हिंदू धर्म में 12 ज्योतिर्लिंग बताए गए हैं और इसमें पहला ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर है. धर्म शास्त्रों में सोमनाथ मंदिर से जुड़ी कई कथाओं व मान्यताओं का जिक्र किया गया है. आइए जानते हैं आखिर सोमनाथ मंदिर को पहला ज्योतिर्लिंग क्यों कहा जाता है.

सोमनाथ और चंद्रमा का रिश्ता

पौराणिक कथाओं के अनुसार जहां आज सोमनाथ मंदिर स्थि​त है वहां दक्ष प्रजापति के श्राप से क्षीण हो रहे सोम यानि चंद्रमा ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी और शिवजी ने तप से प्रसन्न होकर चंद्रमा को पुनजीर्वित किया था. यही वजह है कि यहां स्थि​त शिवलिंग को सोमनाथ कहा जाता है.

पहला ज्योतिर्लिंग कहलाता है सोमनाथ मंदिर

शास्त्रों में उल्लेख है कि सोमनाथ ज्योतिर्लिंग किसी मनाव द्वारा स्थापित नहीं है, बल्कि स्वंयभू है यानि स्वंय प्रकट हुआ है. यही वजह है कि इस शिवलिंग को भगवान शिव के दिव्य प्रकाश का पहला स्वरूप माना जाता है और इसलिए इसे पहला ज्योतिर्लिंग कहते हैं.

शिव पुराण में भी मिलता है उल्लेख

शिव पुराण में भी सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का ​उल्लेख किया गया है. जिसके अनुसार सोमनाथ मंदिर में मौजूद स्वंयभू से ही ज्योतिर्लिंग स्वरूप की पूजा की परंपरा शुरू हुई. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के बाद ही अन्य ज्योतिर्लिंग का स्वरूप बना. यही वजह है कि इसे पहला ज्योतिर्लिंग कहा गया है.

कहते हैं मोक्षस्थल

सोमनाथ मंदिर की बात करें तो यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि हजारों साल पुरानी आस्था, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति का एक जीवंत प्रतीक है. 12 ज्योतिर्लिंग में सबसे पहला ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर है और इसलिए यहां भक्तों व श्रद्धालुओं की अटूट आस्था व विश्वास देखने को मिलता है. स्कंद पुराण में भी सोमनाथ मंदिर का वर्णन किया गया है जिसके अनुसार यह मंदिर उत्तर में 126 किलोमीटर, पूर्व में तुलसीश्याम तक 111 किलोमीटर, पश्चिम में माधवपुर और दक्षिण में समुद्र के दक्षिणी ध्रुव तक फैला हुआ है. कहते हैं कि यह वही स्थान है जहां भगवान ​श्रीकृष्ण ने 56 करोड़ यदुवंशियों के साथ देहोत्सर्ग किया. दक्षिण दिशा को यम की दिशा या पितृलोक की दिशा कहा जाता है और इसलिए इसे मोक्षस्थल भी कहते हैं.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.

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