नई दिल्ली: पुराणों में अयोध्या नगरी को पवित्र स्थली कहा गया है. पुराणों के मुताबिक, अयोध्या भगवान विष्णु के सुगर्शन चक्र में बसी हुई है. महर्षि वाल्मीकि ने भी अयोध्या को पवित्र स्थली कहा है. यह पवित्र सरयू नदी के तट पर बसा है. इसे ‘कौशल देश’ भी कहा जाता था. अयोध्या बौद्ध धर्म, हिन्दू धर्म का पवित्र और जैन धर्म का शाश्वत तीर्थक्षेत्र है. Also Read - UP: अयोध्या में कोरोना के चलते रामनवमी मेला स्थगित, सीमाएं सील होंगी, हरिद्वार कुंभ के संतों को प्रवेश की इजाजत नहीं

हाल ही में श्री राम जन्मभूमि मंदिर परिसर में भूमि के समलतीकरण के दौरान देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां और तमाम पुरावशेष मिले हैं. इस दौरान काफी संख्या में पुरावशेष और देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां मिली हैं. इसके अलावा प्राचीन पुष्प कलश, आमलक आदि कलाकृतियां, मेहराब के पत्थर, ब्लैक टच स्टोन के सात स्तंभ, रेड सैंड स्टोन के छह स्तंभ, पांच फिट आकार की नक्काशीकृत शिवलिंग की आकृति अब तक प्राप्त हुई हैं. अब तक 7 ब्लैक टच स्टोन के स्तंभ, 6 रेडसैंड स्टोन के स्तंभ, 5 फुट के नक्काशीनुमा शिवलिंग और मेहराब के पत्थर आदि बरामद हुए हैं. Also Read - राम जन्मभूमि अयोध्या में रामायण युग से जुड़े पांच तालाबों का होगा कायाकल्प, ये है सरकार की योजना

मुख्य गर्भ स्थल और इसके बगल के चबूतरे आदि के इलाके में समतलीकरण का काम करवाया जा रहा है. इसके साथ ही जहां पहले गर्भ स्थल पर रामलला विराजमान थे, वहां के लिए बने टेढे़-मेड़े दर्शन मार्ग की लोहे की गैलरीनुमा रास्ते के एंगल आदि को भी हटाकर साफ किया गया है. कहा जाता है कि मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम जी के साथ अयोध्या के कीट पतंगे तक उनके दिव्य धाम में चले आए थे जिस वजह से अयोध्या नगरी त्रेता युग में ही उजड़ गई थी तब श्रीराम पुत्र कुश ने ही श्री राम का नाम लेकर अयोध्या नगरी को बसाया था. Also Read - Ayodhya Ram Temple: मंदिर निर्माण में सीता एलिया के पत्थर का इस्तेमाल, जानें इसकी पौराणिक महत्व को

इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि अयोध्या नगरी में एक सीता कुंड भी है, जिसमें जिसमें स्नान करने से मनुष्य के सभी पापों का नाश हो जाता है और जो व्यक्ति अयोध्या में स्नान, जप, तप, हवन, दान, दर्शन, ध्यान आदि करता है उसे पुण्य प्राप्त होता है. बता दें कि समतलीकरण के दौरान मिले अवशेषों को बौद्ध धर्म से जोड़ते हुए दावा कर रहे हैं कि समतलीकरण के दौरान जो अवशेष मिले हैं वह सम्राट अशोक के शासनकाल के दौरान की है. समतलीकरण के दौरान खुदाई में जो अवशेष मिले हैं वह शिवलिंग नहीं बल्कि बौद्ध स्तंभ हैं.