रक्षाबंधन: श्रावण महीने का आखिरी दिन पूरे भारत में राखी के पर्व के रूप में मनाया जाता है. इस पर्व का आरम्भ कहां से हुआ, ये बता पाना तो सम्भव नहीं है. लेकिन पुराणों और धर्मग्रन्थों कई कहानियां मिलती हैं जिन्हें इस पर्व से जोड़ा जा सकता है. Also Read - HC ने छेड़छाड़ के आरोपी को युवती से राखी बंधवाने की शर्त पर दी थी बेल, SC ने जारी किया नोटिस

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पौराणिक कथा के अनुसार असुरों के दानवीर राजा बलि ने सौ यज्ञ पूरे करने का प्रण लिया था. यदि राजा बलि के सौ यज्ञ पूरे हो जाते तो वो तीनों लोकों के स्वामी बन जाते. इससे देवतागण चिंतित थे. घबराकर देवराज इन्द्र ने भगवान विष्णु से राजा बलि को यज्ञ पूरा करने से रोकने की प्रार्थना की.

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देवराज इंद्र की बात सुनकर भगवान विष्णु वामन अवतार लिया. ब्राह्माण वेश धारण कर भगवान राजा बलि के यहां भिक्षा मांगने पहुंच गए. जब राज बलि ने ब्राह्माण बने श्री विष्णु से कुछ माँगने को कहां तो उन्होंने भिक्षा में तीन पग भूमि मांग ली. राजा बलि अपनी दानप्रियता के लिए प्रसिद्ध थे.  उन्होंने वामन वेश में भगवान को तीन पग भूमि दान में देते हुए कहा कि आप अपने तीन पग से भूमि नाप ले.

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भगवान ने एक पग से स्वर्ग ओर दूसरे पग से पृ्थ्वी को नाप लिया. जब तीसरे पग के लिए भूमि शेष नहीं रही बलि ने ने अपना सिर भगवान के आगे कर दिया और कहां तीसरा पग आप मेरे सिर पर रख दीजिए. भगवान श्री विष्णु के पैर रखते ही राजा बलि पाताल लोक पहुंच गए.

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बलि के वचन का पालन करने पर भगवान विष्णु अत्यन्त खुश हुए. उन्होंने राजा बलि को कुछ मांगने के लिए कहा. बलि ने भगवान से सदैव अपने सामने रहने का वचन मांग लिया. भगवान विष्णु अपने वचन का पालन करते हुए राजा बलि के द्वारपाल बन गए.

जब यह बात लक्ष्मी जी को पता चली तो उन्होंने नारद मुनि को बुलाया और इस समस्या का समाधान पूछा. नारद जी ने उन्हें उपाय बताया की आप राजा बलि को राखी बांधकर उन्हें अपना भाई बना ले और उपहार में अपने पति भगवन विष्णु को मांग ले. लक्ष्मी जी ने ऐसा ही किया उन्होंने राजा बलि को राखी बांधकर अपना भाई बनाया और जब राजा बलि ने उनसे उपहार मांगने को कहा तो उन्होंने अपने पति विष्णु को उपहार में मांग लिया.

इन्द्राणी ने पति इन्द्र को बांधा था रक्षासूत्र

एक बार देवताओं और दानवों में युद्ध हुआ, जो कई दिनों तक चलता रहा. जिसमे की देवताओं की हार होने लगी, यह सब देखकर देवराज इंद्र बड़े निराश हुए तब इंद्र की पत्नी शचि ने विधान पूर्वक एक रक्षासूत्र तैयार किया और श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को ब्राह्मणो द्वारा देवराज इंद्र के हाथ पर बंधवाया जिसके प्रभाव से इंद्र युद्ध में विजयी हुए.

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द्रौपदी ने बांधी भगवान श्रीकृष्ण को राखी

महाभारत के एक प्रसंग के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने जब सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया, तब शिशुपाल का सिर काटने के बाद जब चक्र वापस कृष्ण के पास आया तो उस समय कृष्ण की उंगली कट गई और भगवान कृष्ण की उंगली से रक्त बहने लगा. यह देखकर द्रौपदी ने अपनी साडी़ का किनारा फाड़ कर कृष्ण की उंगली में बांध दिया.

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कृष्ण ने तब द्रौपदी को सदैव उनकी रक्षा करने का वचन दिया. भगवान कृष्ण द्रौपदी को अपनी बहन मानते थे. तभी से रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाईयों को राखी बांधती हैं और भाई उसकी रक्षा करने का वचन देता है.

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