लखनऊ: आप नौकरी करते हैं या कोई व्‍यवसाय, किसी में आपको सफलता नहीं मिल रही है, चाहे उसके लिए आप कितनी भी मेहनत कर लो. ऐसे में अगर कोई सूर्य की उपासना करे तो उसके सारे बिगड़े काम बन जाते हैं. सूर्य को ब्रह्माण्ड की आत्मा कहा जाता है. भगवान सूर्य के लिए रविवार का दिन सुनिश्चित है. भगवान सूर्य की आराधना अलग-अलग तरीके से लोग करते है. कोई सूर्य को जल चढ़ाकर आराधना करता है तो कोई रविवार को व्रत करके पूजा करता है. ज्‍यादातर लोग हर दिन की विशेष पूजाएं करते हैं. कई लोग रविवार को छुट्टी का दिन मानते हैं लेकिन इस दिन कई लोग पूजा अर्चना और व्रत रखकर अपना दिन लाभकारी बनाते हैं. ऐसे ही लोगों के लिए आज हम विशेष रविवार की व्रत विधान बता रहे हैं.

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सूर्य पूजा से क्‍या है लाभ
सूर्य के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए और सूर्य को बलवान बनाने के लिए रविवार का व्रत करना बहुत ही फलदायक है. इस व्रत को करने से आयु और सौभाग्य में वृद्धि होती है. साथ ही सर्व कामना सिद्धि भी प्राप्त होती है. यह व्रत चर्म और नेत्र आदि विकार नाशक भी है. इस व्रत को निम्न तरीके से पूर्ण श्रद्धा के साथ करे.

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ऐसे करें रविवार का व्रत

  • रविवार का व्रत किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम रविवार से प्रारंभ करे और एक वर्ष अथवा 21 या 51 रविवार तक करे.
  • रविवार के दिन सुबह स्नान आदि करके लाल वस्त्र धारण करें एवं मस्तक पर लाल चन्दन का तिलक करे और तांबे के कलश में जल लेकर उसमे रोली, अक्षत, लाल पुष्प डालकर श्रद्धापूर्वक सूर्यनारायण को अर्ध्य प्रदान करे. साथ ही “ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम:” इस बीज मंत्र का यथाशक्ति जाप करे.
  • इस दिन भोजन सूर्यास्त से पहले करे. भोजन में गेहूं की रोटी अथवा गेहूं का दलिया बनाये. भोजन से पूर्व भोजन का कुछ भाग मंदिर में दे या बालक-बालिका को देकर भोजन कराएं. भोजन में कोई पकवान या स्वादिष्ठ खाना न ले. भोजन सामान्य से सामान्य ले. भोजन में नमक का प्रयोग कतई न करे.
  • अंतिम रविवार को व्रत का उद्यापन करने का विधान है. उद्यापन में योग्य ब्राह्मण से हवन करवाये. हवन क्रिया के पश्चात योग्य दम्पति को भोजन कराकर लाल वस्त्र एवं यथेच्छा दक्षिणा प्रदान करे. इस प्रकार आपके सूर्य व्रत सम्पूर्ण माने जाएंगे.

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