नई दिल्‍ली: रविवार छह जनवरी को आंशिक सूर्य ग्रहण होने वाला है. हालांकि यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा. रविवार के दिन चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाएगा. चंद्रमा के इस तरह बीच में आने से धरती पर उसकी छाया पड़ेगी, जिसे ग्रहण कहा जाता है. हालांकि यह आंशिक सूर्य ग्रहण है और भारत में आप इसे नहीं देख पाएंगे. यह आंशिक सूर्य ग्रहण उत्‍तर-पूर्वी एशिया और उत्‍तरी पैसिपिफक देशों में दिखाई देगा. यानी यह जापान, कोरिया, मंगोलिया, ताइवान और रूस व चीन के पूर्वी छोर के अलावा अमेरिका के पश्चिमी हिस्‍से में भी यह ग्रहण दिखाई देगा.

भारतीय समय अनुसार, आंशिक सूर्य ग्रहण सुबह 5:04 मिनट से शुरू होकर 9:18 बजे खत्‍म हो जाएगा. अगर आप भारत में सूर्य ग्रहण देखना चाहते हैं तो इसके लिए आपको साल के अंत तक इंतजार करना पड़ेगा. क्‍योंकि साल के आखिर में यानी 26 दिसंबर 2019 को भारत में आंशिक सूर्य ग्रहण देखने को मिलेगा. यह सूर्य ग्रहण 2 घंटे 40‍ मिनट और 6 सेकेंड तक चलेगा. अगर साल के अंत में मौसम ठीकठाक रहा तो आप इस सूर्य ग्रहण को देख भी पाएंगे. इस सूर्यग्रहण की शुरुआत सुबह 8:17 मिनट पर होगी और सुबह ही 10:57 बजे यह सूर्य ग्रहण खत्‍म हो जाएगा.

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सूर्य ग्रहण में क्‍या करें, क्‍या नहीं
सूर्यग्रहण के दौरान कुछ कार्य करने की मनाही होती है. मान्‍यता के अनुसार सूर्यग्रहण के दौरान कुछ कार्यों को करने से विपरीत असर होते हैं. उनमें कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं:
1. सूर्यग्रहण के दौरान पूजा-पाठ से संबंधित कोई काम ना करें. खासतौर से इस समय भगवान की मूर्त‍ि या तस्‍वीरों को हाथ नहीं लगाया जाता. पूजा-पाठ नहीं करना चाहिए. हालांकि भगवान के नाम की जाप कर सकते हैं. इस दौरान मंत्रों का जप करना भी लाभदायक होता है.
2. इस दौरान खाना नहीं खाया जाता. सूर्य ग्रहण के दौरान वातावरण में नकारात्‍मकता ज्‍यादा रहती है और ऐसी मान्‍यता है कि इस दौरान भोजन करने से सेहत पर विपरीत असर होता है.

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3. इस दौरान तुलसी के पत्‍तों को भूलकर भी नहीं तोड़ना चाहिए. सूर्यग्रहण के दौरान तुलसी और शामी को ना छूएं.
4. ग्रहण के सोना भी नहीं चाहिए. अगर आप बहुत ज्‍यादा थके हुए हैं तो पैर फैलाकर बैठ सकते हैं. हालांकि इसमें बच्‍चों और बुजुर्गों के लि‍ए छूट है.
5. ज्योतिष यह भी मानते हैं कि ग्रहण को खुले आकाश के नीचे जाकर नहीं देखना चाहिए. क्योंकि इसका प्रभाव नकारात्मक होता है. खासतौर से प्रेग्नेंट महिलाओं को इस दौरान घर के बाहर नहीं आना चाहिए. ऐसी मान्यता है कि इसका बच्चे और मां दोनों प्रभावित होते हैं.

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