
Renu Yadav
रेनू यादव, India.Com हिंदी में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के पद कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में करीब 15 वर्षों के अनुभव के दौरान उन्हें टेक्नोलॉजी, धर्म, लाइफस्टाइल, हेल्थ व अन्य विषयों ... और पढ़ें
Lord Hanuman Ji Puja: कहते हैं कि यदि भगवान राम की कृपा पानी हो तो सबसे पहले उनके भक्त हनुमान जी को प्रसन्न करें और उनका पूजन करें. क्योंकि जब भी भक्त और भक्ति की बात होती है तो हनुमान जी को नाम से पहले आता है. हनुमान जी प्रभु राम के परम भक्त हैं और उनके कण-कण में भगवान राम की भक्ति समाहित है. इसलिए लोग भगवान राम के साथ ही हनुमान जी का भी पूजन अवश्य करते हैं. कहा जाता है कि रामभक्त हनुमान का पूजन करने से जीवन में आ रहे सभी रोग, दोष, कष्ट व भय से मुक्ति मिलती है. इसलिए लोग पूरे भक्ति भक्तिभाव से हनुमान जी का पूजन करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि उत्तराखंड में एक ऐसा गांव ऐसा है जहां लोग भगवान राम की पूजा तो करते हैं लेकिन हनुमान जी का पूजन नहीं करते.
भगवान राम की पूजा में हनुमान का भी पूजन शामिल होता है, लेकिन देवभूमि उत्तराखंड के अल्मोड़ा में बसा एक छोटा सा गांव हनुमान जी का पूजन नहीं करता, इस गांव के लोग आज भी हनुमान से नाराज़ हैं. इस गांव का नाम द्रोणागिरि है और यहां रहने वाले लोग भगवान राम के साथ कभी भी हनुमान का नाम नहीं लेते. द्रोणागिरि गांव में बने मंदिर में भगवान राम की प्रतिमा मौजूद है। लेकिन, हनुमान की नहीं. पूजा-पाठ में राम का नाम लिया जाता है, लेकिन हनुमान का नहीं. इस नाराजगी के पीछे एक पौराणिक कथा है, जिसे गांव के लोग आज भी मानते हैं.
इसकी वजह रामायण काल से जुड़ी हुई है. कहते हैं कि जब युद्ध में लक्ष्मण को शक्ति बाण लगा था, तब वे मूर्छित होकर गिर पड़े थे. ऐसे में उनकी जान बचाने के लिए भगवान राम ने हनुमान जी को संजीवनी बूटी लाने का आदेश दिया था. संजीवनी लेने के लिए हनुमान द्रोणागिरि गांव आए थे और वहां बिना किसी की इजाजत के पूरा पहाड़ उठाकर ले गए थे. इस बात से पर्वत के रक्षक, पूजनीय लोक देवता लाटू, नाराज हुए. हनुमान का बिना इजाजत लिए पर्वत को ले जाना उन्हें अपमान लगा.
यह भी कहा जाता है कि जब हनुमान जी पर्वत को ले जा रहे थे, तब पर्वत देवता ध्यान में थे और हनुमान की वजह से उनकी तपस्या भंग हो गई. इतना ही नहीं, जिस हिस्से को हनुमान जी ने पर्वत से अलग किया था, वहां से आज भी लाल रंग का पानी निकलता है, जिसे वहां के स्थानीय लोग पर्वत देवता का रक्त मानते हैं. यही वजह है कि इस गांव में आज भी हनुमान जी की पूजा वर्जित मानी गई है. द्रोणागिरि गांव के घरों व मंदिरों में हनुमान जी के नाम की पताका भी नहीं लगाई जाती है. पूरा गांव आज भी हनुमान जी से नाराज़ है और कोई अपने मुख से उनका नाम भी नहीं लेता.
इनपुट: आईएएनएस
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.
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