हर साल मकर संक्रांति के मौके पर तिल के बराबर बढ़ता है शिवलिंग का आकार...इस मंदिर का रहस्य जानकर रह जाएंगे दंग

तिलभांडेश्वर महादेव: भगवान शिव की नगरी काशी में एक ऐसा अनोखा मंदिर है जिसमें शिवलिंग का आकार मकर संक्रांति पर बढ़ा हुआ नजर आता है.

Published date india.com Published: January 8, 2026 9:31 AM IST
हर साल मकर संक्रांति के मौके पर तिल के बराबर बढ़ता है शिवलिंग का आकार...इस मंदिर का रहस्य जानकर रह जाएंगे दंग

तिलभांडेश्वर महादेव: हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार सृष्टि के कण-कण में भगवान शिव का वास है और भोलेनाथ की उपासना करने से जीवन में आ रहे सभी कष्ट मिट जाते हैं. कहते हैं कि भगवान शिव का न कोई मूल आकार है और न ही रूप है. इसलिए भक्त भगवान शिव को अपनी भक्ति के अनुसार किसी भी रूप में पूजते हैं और भोलेनाथ भी भक्तों की अराधना स्वीकार करते हैं. हमारे देश के अलग-अलग मंदिरों में मौजूद शिवलिंग स्वयं इस बात की गवाही देते हैं. ऐसा ही एक मंदिर वाराणसी में स्थित है, जो हर साल तिल बराबर बढ़ता है. मान्यता है कि हर साल शिवलिंग के आकार में परिवर्तन देखा जाता है.

यहां शिवलिंग पर चढ़ाए जाते हैं तिल

काशी विश्वनाथ मंदिर से 2 किलोमीटर दूर पांडे हवेली की गली में भगवान शिव और मां पार्वती को समर्पित बाबा तिलभांडेश्वर महादेव का मंदिर है. मंदिर के नाम से साफ है कि बाबा का संबंध तिल से है और कोई भी इच्छा पूरी होने पर बाबा को तिल अर्पित किए जाते हैं. यहां का शिवलिंग बाकी मंदिरों से काफी अलग है. शिवलिंग का आकार किसी गुंबद की तरह है और इस पर बड़ी सी गोल आकृति भी बनी है.

माना जाता है कि भगवान शिव बाबा तिलभांडेश्वर के रूप में भक्तों को सुख और समृद्धि प्रदान करते हैं. मंदिर 2,500 वर्ष पुराना है और इसका अस्तित्व सतयुग से है. कहा जाता है कि पहले शिवलिंग सामान्य आकार का हुआ करता था, लेकिन द्वापर युग तक शिवलिंग का आकार बढ़ता गया.

मकर संक्रांति पर बढ़ता है शिवलिंग का आकार

कलयुग में प्रवेश के साथ भक्तों ने बाबा के बढ़ते रूप को लेकर चिंता व्यक्त की और उनसे प्रार्थना की कि वे अपना आकार स्थिर कर लें. भक्तों की प्रार्थना को बाबा ने स्वीकार किया और साल में एक बार, सिर्फ मकर संक्रांति पर तिलभर बढ़ने का वचन दिया. उस समय से लेकर अब तक बाबा साल में एक बार मकर संक्रांति के दिन अपना आकार बदलते हैं.

मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग 3.5 फीट का है, जबकि उसका व्यास 3 फीट है. मंदिर के इतिहास को मां शारदा से जोड़कर भी देखा गया है. माना जाता है कि इस मंदिर में मां शारदा ने तपस्या की थी और भगवान शिव को प्रसन्न कर वरदान पाया था. काशी को दो भागों में विभाजित माना जाता है, जिसमें एक है काशी खंड और दूसरी है केदार खंड. बाबा तिलभांडेश्वर महादेव का मंदिर केदारखंड में स्थित है.

इनपुट: आईएएनएस

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