इस मंदिर में विराजमान हैं दो मुखी हनुमान जी...जिनके दर्शन मात्र से ही दूर हो जाते हैं भक्तों के सभी कष्ट

उनामंचेरी कोदंडरामा स्वामी मंदिर: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी का पूजन करने से भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं और रोग व दोष से भी मुक्ति मिलती है. इसलिए हनुमान जी को संकटमोचन भी कहा जाता है.

Published date india.com Updated: December 29, 2025 5:40 PM IST
इस मंदिर में विराजमान हैं दो मुखी हनुमान जी...जिनके दर्शन मात्र से ही दूर हो जाते हैं भक्तों के सभी कष्ट

Lord Hanuman Ji Mandir: हिंदू धर्म शास्त्रों में राम भक्त हनुमान जी को संकटमोचन भी कहा जाता है और जो भक्त विधि-विधान से बजरंगबली का पूजन करते हैं उनके जीवन में आ रहे सभी दुख-दर्द दूर हो जाते हैं. यह भी मान्यता है कि हनुमान जी का पूजन करने से भक्तों को शारीरिक कष्टों से भी मुक्ति मिलती है. शारीरिक कष्टों से छुटकारा पाने के लिए भक्त अलग-अलग मंदिरों में जाते हैं.

तमिलनाडु के चेंगलपट्टू जिले में भगवान राम का एक ऐसा मंदिर है, जहां दर्शन मात्र से शरीर के पुराने से पुराने रोगों से मुक्ति मिल जाती है. इसका नाम उनामंचेरी कोदंडरामा स्वामी मंदिर है जहां हनुमान जी बेहद ही अद्भुत रूप में विराजमान हैं.

तमिलनाडु के चेंगलपट्टू जिले में तांबरम के पास प्राचीन उनामंचेरी कोदंडरामा स्वामी मंदिर है, जिसे स्थानीय लोग श्री कोठंडा रामास्वामी मंदिर के नाम से भी जानते हैं. यह मंदिर अपने भव्य गोपुरम और सुंदर वातावरण के लिए प्रसिद्ध है. मंदिर के गर्भगृह में प्रभु श्रीराम, मां सीता और लक्ष्मण विराजमान हैं. खास बात यह है कि मंदिर में हनुमान की दुर्लभ और प्राचीन प्रतिमा स्थापित है. कहा जाता है कि ऐसी प्रतिमा दुनिया में किसी मंदिर में नहीं है.

मंदिर के गर्भगृह में हनुमान की दोमुख वाली प्रतिमा मौजूद है, जिसमें एक मुख प्रभु श्री राम, मां सीता और लक्ष्मण की तरफ है, जबकि दूसरा मुख दर्शन करने आने वाले भक्तों की तरफ है. माना जाता है कि शारीरिक रोगों से परेशान भक्त इस मंदिर में रोगों से मुक्ति पाने के लिए आते हैं. हनुमान की दृष्टि मात्र से सारे कष्ट और रोगों का नाश होता है. मंदिर के गर्भगृह में भरत और शत्रुघ्न की प्रतिमा भी मौजूद हैं. भरत और शत्रुघ्न दोनों कोनों में हाथ जोड़कर नमस्कार मुद्रा में विराजमान हैं. यह देश का पहला मंदिर है, जहां प्रभु श्री राम अपने तीनों भाइयों, मां सीता और अपने प्रिय भक्त हनुमान के साथ हैं.

मंदिर से जुड़ी प्रचलित किंवदंती के अनुसार इसका निर्माण विजयनगर वंश के अच्युत राय द्वारा दिए गए आदेश के बाद करवाया गया. कहते हैं कि अच्युत राय दिव्यांग थे और कई तरह के शारीरिक कष्टों से जूझ रहे थे. इन कष्टों से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने भगवान विष्णु की कठोर तपस्या की. जिससे प्रसन्न होकर स्वंय श्रीहरि विष्णु ने उन्हें दर्शन दिए थे. दर्शन के दौरान भगवान विष्णु ने अच्युत राय को राम मंदिर बनाने का आदेश दिया था जिसमें हनुमान जी की दोमुखी प्रतिमा स्थापित की गई.

इनपुट: आईएएनएस

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