मां वैष्‍णो देवी (Vaishno Devi Shrine) के भक्‍तों के लिए अच्‍छी खबर है. त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित वैष्णो देवी मंदिर की पुरानी और प्राकृतिक गुफा (Old Cave) श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दी गई है.

इस गुफा का मां के भक्‍तों के लिए विशेष महत्‍व है. अधिकारियों ने बताया कि पुरानी गुफा हर साल केवल जनवरी-फरवरी के दौरान खोली जाती है, जब भीड़ बहुत कम होती है. शेष महीनों में तीर्थयात्रियों को गर्भगृह तक पहुंचने के लिए नई गुफाओं से होकर गुजरना पड़ता है.

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गुफा का महत्व
ये प्राकृतिक एवं पुरानी गुफा काफी महत्‍वपूर्ण है. जितना महत्व वैष्णो देवी मंदिर का है, उतना ही महत्व इस गुफा का भी है. इस गुफा को बहुत ही चमत्कारी माना जाता है. काफी पहले माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए इसी गुफा का प्रयोग किया जाता है. पर बाद में इसे बंद कर दिया गया. अभी जिस रास्ते का इस्तेमाल किया जाता है, वह प्राकृतिक रास्ता नहीं है. श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए नए रास्ते का निर्माण 1977 में किया गया था. अभी इसी रास्ते से श्रद्धालु माता के दरबार पहुंचते हैं.

प्राचीन गुफा से जुड़ी मान्यताएं
इस गुफा से कई मान्‍यताएं जुड़ी हैं. कहा जाता है कि पुरानी गुफा में भैरव का शरीर मौजूद है. माता ने यहीं पर भैरव को त्रिशूल से मारा था और उसका सिर उड़कर भैरव घाटी में चला गया था. पर, शरीर इस गुफा में रह गया. इस प्राचीन गुफा में गंगाजल प्रवाहित होता रहता है.

वैष्णो देवी मंदिर तक पहुंचने के लिए आदि कुंवारी या आद्यकुंवारी का पड़ाव पार करना होता है. यहीं गर्भजून नाम की गुफा भी है. इस गुफा में माता ने नौ महीने प्रवास किया था. इस गुफा में जो जाता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है.

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