Vakratunda Sankashti 2021: कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ के साथ गणेश चतुर्थी का पर्व भी मनाया जाता है. इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है. इस दिन लोग भगवान गणपति की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं. मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजन करने से कष्टों का नाश होता है. किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान श्री गणेश की पूजा की जाती है. आज यानी 24 अक्टूबर 2021 को वक्रतुण्ड संकष्टी (Vakratunda Sankashti 2021) का पर्व मनाया जा रहा है. आइए जानते हैं शुभ समय

वक्रतुण्ड संकष्टी का समय (Vakratunda Sankashti 2021 Shubh Muhurat)

वक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थी रविवार, अक्टूबर 24, 2021 को
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ – अक्टूबर 24, 2021 को 03:01 ए एम बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त – अक्टूबर 25, 2021 को 05:43 ए एम बजे

वक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि (Vakratunda Sankashti Puja Vidhi)

वक्रतुण्ड संकष्टी के दिन व्रत करने वाले लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान करके साफा वस्त्र पहनें. इस दिन लाल रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है. इसके बाद गणपति भगवान की पूरी शुरू करेग. पूजा के लिए जातक का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए. फिर गणपति जी को फूलों की माला से सजाएं. पूजा में तांबे के बर्तन में पानी, तिल, गुड़, लड्डू, धूप, चंदन और प्रसान के तौर पर केला नारियल रखें. गणपति को रोली लगाएं और फिर फिर फूल व जल अर्पित करें. इसके बाद मोदक व लड्डू का भोग चढ़ाएं. ध्यान रखें कि इस पूजा में देवी दुर्गा की मूर्ति को अपने पास रखना शुभ माना जाता है. यह व्रत रात को चंद्रम को देखकर खोला जाता है.

वक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थी का महत्व (Vakratunda Sankashti Importance)

हिंदुओं मान्याओं के अनुसार संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणपति की विधि विधान से पूजा करने से घर से नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं. भगवान गण​पति घर की सारी विपदाओं को दूर करते हैं और आपकी मनोकामना भी पूर्ण करते हैं.