वट सावित्री व्रत के दिन महिलाएं वटवृक्ष यानी बरगद की पूजा करती हैं. वटवृक्ष के महत्व का वर्णन पौराणिक कथाओं में भी किया गया है. वटवृक्ष का ना केवल धार्मिक, बल्कि इसका वैज्ञानिक महत्व भी है. ज्योतिषी मानते हैं कि बरगद के पेड़ में तीनों देव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश निवास करते हैं. इसलिए महिलाएं इसकी पूजा करती हैं और पति की लंबी आयु की कामना करती हैं. इसके अलावा ज्येष्ठ के महीने में चिलचिलाती गर्मी होती है और ऐसे में बरगद का पेड़ जीवनदायी छांव प्रदान करते हैं. वटवृक्ष की पूजा कर लोग एक तरह से प्रकृति की पूजा करते हैं.

बरगद के पेड़ की औसत आयु 300 वर्ष होती है. इसलिए महिलाएं इस पेड़ की पूजा कर यह कामना करती हैं कि उनके सुहाग की उम्र भी उतनी ही लंबी हो. बरगद के पेड़ पर पतझड़ का सबसे कम असर होता है. ऐसे ही महिलाएं कामना करती हैं कि परिस्थियां कोई भी हों, उनके सुहाग पर कोई असर ना हो.

Vat Savitri 2018: आज जरूर सुनें सावित्री की व्रत कथा, मिलेगा पति की लंबी आयु और संतान सुख का वरदान

अध्यात्मिक महत्व

वट सावित्री व्रत कथा के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या के दिन ही सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले लिए थे. सावित्री ने उस बरगद के पेड़ के नीचे ही अपने पति सत्यवान को लेटाया था और इसके नीचे ही सत्यवान को अपने प्राण वापस मिल गए. सावित्री ने ना केवल अपने पति के प्राण वापस लिए, बल्कि खोया हुआ राजपाठ और सास ससुर की आंखों की रोशनी भी वापस ले ली. बरगद के पेड़ की जटाओं को सावित्री का रुप माना जाता है. सावित्री सुहागिनों के लिए आदर्श है, जिसने अपने पति को मौत के मुंह से बाहद निकाल लिया.