Vat Savitri vart 2026: अखंड सौभाग्य का महापर्व वट सावित्री व्रत इस साल 16 मई 2026 को मनाया जाएगा. अक्सर हम सुनते हैं कि सावित्री ने यमराज के सामने पति के जीवन मांगा था लेकिन पौराणिक तथ्यों और शास्त्रों के विश्लेषण से एक बेहद रोचक बात सामने आती है. सावित्री ने कभी यमराज से सीधे तौर पर प्राण नहीं मांगे थे, बल्कि यह उनकी बौद्धिक जीत थी. सावित्री ने यमराज को ही धर्मसंकट में डाल दिया था.
महाभारत के वनपर्व में वर्णित कथा के अनुसार, सावित्री एक विदुषी महिला थीं. जब यमराज सत्यवान के प्राण लेकर दक्षिण दिशा की ओर बढ़े, तो सावित्री ने उनका पीछा करते हुए विलाप करने के बजाय धर्म और नीति पर संवाद शुरू किया. सावित्री के गूढ़ ज्ञान से प्रभावित होकर यमराज ने उन्हें सत्यवान के जीवन को छोड़कर तीन वरदान मांगने को कहा.
सावित्री ने अपने पहले दो वरदानों में ससुर की आंखों की रोशनी और राज्य मांगा. लेकिन असली खेल तीसरे वरदान में हुआ.
सावित्री का वरदान: उन्होंने मांगा कि वे सौ पुत्रों की माता बनें.
यमराज की स्वीकृति: यमराज ने बिना सोचे ‘तथास्तु’ कह दिया.
तार्किक काउंटर: वरदान मिलते ही सावित्री ने विनम्रता से यमराज को याद दिलाया कि एक पतिव्रता स्त्री के लिए पति के बिना संतान सुख प्राप्त करना असंभव और अधर्म है. यदि सत्यवान के प्राण नहीं लौटते, तो यमराज का अपना वरदान झूठा साबित हो जाता.
यमराज को ‘धर्मराज’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि वे धर्म और अपने वचन की रक्षा के लिए बाध्य हैं. सावित्री ने उन्हें ऐसे तार्किक गतिरोध में डाल दिया था जहां यमराज के पास केवल दो ही रास्ते थे या तो अपना वरदान वापस लें (जो देवत्व के विरुद्ध था) या सत्यवान को जीवित करें. अंततः, यमराज को हार माननी पड़ी और उन्होंने सत्यवान के प्राण लौटा दिए.
इस वर्ष यह व्रत शनिवार को पड़ रहा है, जो इसे और भी प्रभावशाली बनाता है.
अमावस्या तिथि प्रारंभ: 16 मई, सुबह 05:11 बजे.
अमावस्या तिथि समाप्त: 17 मई, रात 01:30 बजे.
मुख्य पूजन सामग्री: बाँस का पंखा (बेना), बरगद के फल, कच्चा सूत, भीगे चने, आम, खरबूजा और सुहाग का पूरा सामान.
वट सावित्री की यह कथा हमें सिखाती है कि कठिन से कठिन समय में भी केवल भावनाओं के बहकावे में न आकर अपनी बुद्धि और विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए. सावित्री का सतीत्व उनकी शक्ति थी, लेकिन उनकी बुद्धिमानी उनकी सबसे बड़ी जीत का आधार बनी.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.
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