नई दिल्ली: वट सावित्री का व्रत कुछ ही दिनों में है. इस साल वट सावित्री का व्रत 22 मई 2020 को मनाया जाएगा. इस व्रत में सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं. वट सावित्री का व्रत हर साल ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को रखा जाता है. इस व्रत में सुहागन महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं.  इस त्योहार को उत्तर प्रदेश और बिहार में बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है.  साथ ही पूरे विधि विधान से इस व्रत की कथा सुनती हैं. वट सावित्री के दिन सभी सुहागन महिलाएं पूरे 16 श्रृंगार कर बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं. ऐसा पति की लंबी आयु की कामना के लिए किया जाता है. Also Read - Vat Savitri vrat 2020 Significance: आज है वट सावित्री व्रत, जानें क्या है इस दिन का महत्व

इस मंत्र के जाप से पूरी होती है हर मनोकामना Also Read - Vat Savitri Vrat 2020 Mehndi Designs: इस वट सावित्री हाथों पर लगाएं मेहंदी के ये आसान डिजाइन

मान्यता है कि सावित्री को अर्घ्य देने से पहले इस मंत्र का जाप करना चाहिए-
अवैधव्यं च सौभाग्यं देहि त्वं मम सुव्रते.
पुत्रान्‌ पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तुते.. Also Read - Vat Savitri Vrat 2020 Date: जानें कब है वट सावित्री व्रत, इस तरह करें पूजा, ये है शुभ मुहूर्त

वट वृक्ष की पूजा करते समय करें इस मंत्र का जाप

यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले.
तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च सम्पन्नं कुरु मा सदा..

क्या है कहानी

हिन्दू धर्म के अनुसार, सावित्री ने बरगद पेड़ के नीचे ही अपने मृत पति सत्यवान को जीवित किया था. इसलिए इस व्रत का नाम वट सावित्री पड़ा. वट सावित्री व्रत में बरगद के पेड़ का महत्व सबसे अधिक है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, सनातन संस्कृति में ऐसा माना जाता है कि बरगद के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास होता है. इसके अलावा, सुहागिन महिलाएं ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी से अमावस्या तक तीन दिनों के लिए उपवास रखती हैं.

कहते हैं कि भद्र देश के राजा अश्वपति के कोई संतान न थी. उन्होंने संतान की प्राप्ति के लिए मंत्रोच्चारण के साथ प्रतिदिन एक लाख आहुतियाँ दीं. अठारह वर्षों तक यह क्रम जारी रहा. इसके बाद सावित्रीदेवी ने प्रकट होकर वर दिया कि ‘राजन तुझे एक तेजस्वी कन्या पैदा होगी.’ सावित्रीदेवी की कृपा से जन्म लेने की वजह से कन्या का नाम सावित्री रखा गया.

कन्या बड़ी होकर बेहद रूपवान थी. योग्य वर न मिलने की वजह से सावित्री के पिता दुःखी थे. उन्होंने कन्या को स्वयं वर तलाशने भेजा. सावित्री तपोवन में भटकने लगी. वहाँ साल्व देश के राजा द्युमत्सेन रहते थे क्योंकि उनका राज्य किसी ने छीन लिया था. उनके पुत्र सत्यवान को देखकर सावित्री ने पति के रूप में उनका वरण किया. कहते हैं कि साल्व देश पूर्वी राजस्थान या अलवर अंचल के इर्द-गिर्द था. सत्यवान अल्पायु थे. वे वेद ज्ञाता थे. नारद मुनि ने सावित्री से मिलकर सत्यवान से विवाह न करने की सलाह दी थी परंतु सावित्री ने सत्यवान से ही विवाह रचाया. पति की मृत्यु की तिथि में जब कुछ ही दिन शेष रह गए तब सावित्री ने घोर तपस्या की थी, जिसका फल उन्हें बाद में मिला था.

वट सावित्री अमावस्या मुहूर्त

अमावस्या तिथि प्रारम्भ – मई 21, 2020 को 09:35 पी एम बजे
अमावस्या तिथि समाप्त – मई 22, 2020 को 11:08 पी एम बजे