Vijaya Ekadashi 2020: विजया एकादशी पर भगवान विष्‍णु का पूजन किया जाता है. अगर आप पूरे मन से श्रीहरि का पूजन कर लेते हैं तो जीवन से हर तरह के दुख दूर हो जाते हैं. Also Read - Vrat Tyohar 17-23 February 2020: महाशिवरात्रि समेत इस सप्‍ताह हर दिन प्रमुख व्रत-त्‍योहार, देखें पांचांग

इस दिन श्रीहरि के पूजन के दौरान व्रत कथा कहनी चाहिए. बिना व्रत कथा कहे व्रत पूर्ण नहीं माना जाता. यहां पढ़ें विजया एकादशी की पौराणिक व्रत कथा- Also Read - Vijaya Ekadashi 2020: हर कार्य में सफलता दिलाता है विजया एकादशी व्रत, महत्‍व, शुभ मुहूर्त, व्रत विधि

विजया एकादशी व्रत कथा

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द्वापर युग में धर्मराज युद्धिष्ठिर को फाल्गुन एकादशी के महत्व के बारे में जानने की जिज्ञासा हुई. उन्होंने अपनी शंका भगवान श्री कृष्ण के सामने प्रकट की. भगवान श्री कृष्ण ने फाल्गुन एकादशी के महत्व व कथा के बारे में बताते हुए कहा, हे कुंते कि सबसे पहले नारद मुनि ने ब्रह्मा जी से फाल्गुन कृष्ण एकादशी व्रत की कथा व महत्व के बारे में जाना था, उनके बाद इसके बारे में जानने वाले तुम्हीं हो.

बात त्रेता युग की है जब भगवान श्रीराम माता सीता के हरण के पश्चात रावण से युद्ध करने लिये सुग्रीव की सेना को साथ लेकर लंका की ओर प्रस्थान किया तो लंका से पहले विशाल समुद्र ने रास्ता रोक लिया. समुद्र में बहुत ही खतरनाक समुद्री जीव थे जो वानर सेना को हानि पहुंचा सकते थे. चूंकि श्री राम मानव रूप में थे इसलिये वह इस गुत्थी को उसी रूप में सुलझाना चाहते थे.

उन्होंने लक्ष्मण से समुद्र पार करने का उपाय जानना चाहा तो लक्ष्मण ने कहा कि हे प्रभु वैसे तो आप सर्वज्ञ हैं फिर भी यदि आप जानना ही चाहते हैं तो मुझे भी स्वयं इसका कोई उपाय नहीं सुझ रहा लेकिन यहां से आधा योजन की दूरी पर वकदालभ्य मुनिवर निवास करते हैं, उनके पास इसका कुछ न कुछ उपाय हमें अवश्य मिल सकता है. फिर क्या था भगवान श्री राम उनके पास पंहुच गये.

उन्हें प्रणाम किया और अपनी समस्या उनके सामने रखी. तब मुनि ने उन्हें बताया कि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को यदि आप समस्त सेना सहित उपवास रखें तो आप समुद्र पार करने में तो कामयाब होंगे ही साथ ही इस उपवास के प्रताप से आप लंका पर भी विजय प्राप्त करेंगें.

समय आने पर मुनि वकदालभ्य द्वारा बतायी गई विधिनुसार भगवान श्री राम सहित पूरी सेना ने एकादशी का उपवास रखा और रामसेतु बनाकर समुद्र को पार कर रावण को परास्‍त किया.

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