विनायक चतुर्थी 2019: हिन्दू माह में दो चतुर्थी तिथि आती है, एक कृष्ण पक्ष में और एक शुक्ल पक्ष में. शास्त्रों के अनुसार, चतुर्थी तिथि भगवान श्री गणेश को समर्पित है. इन दो चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी और संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है. जिनमें से एक अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष में आती है और दूसरी पूर्णिमा के बाद कृष्ण पक्ष में आती है. कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है.

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8 फरवरी को विनायक चतुर्थी है. विनायक चतुर्थी को वरद विनायक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है. भगवान से अपनी किसी भी मनोकामना की पूर्ति के आशीर्वाद को वरद कहते हैं. जो श्रद्धालु विनायक चतुर्थी का उपवास करते हैं भगवान गणेश उसे ज्ञान और धैर्य का आशीर्वाद देते हैं. ज्ञान और धैर्य दो ऐसे नैतिक गुण है जिसका महत्व सदियों से मनुष्य को ज्ञात है. जिस मनुष्य के पास यह गुण हैं वह जीवन में काफी उन्नति करता है और मनवान्छित फल प्राप्त करता है.

हिन्दु कैलेण्डर के अनुसार विनायक चतुर्थी के दिन गणेश पूजा दोपहर को मध्याह्न काल के दौरान की जाती है. इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से व्‍यापार में बढ़ोत्‍तरी होती है. साथ ही मानसिक शांति प्राप्त होती है व घर में खुशहाली का वातावरण बना रहता है. इस दिन दान का भी विशेष महत्व है. जरूरतमंदों को गर्म कपड़े, कंबल, कपड़े आदि दान करें तो बेहतर रहता है.

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विनायक चतुर्थी व्रत और पूजा विधि
– ब्रह्म मूहर्त में उठकर नित्य कर्म से निवृत्त होकर स्नान करें, लाल रंग के वस्त्र धारण करें.
– दोपहर पूजन के समय अपने-अपने सामर्थ्य के अनुसार सोने, चांदी, पीतल, तांबा, मिट्टी अथवा सोने या चांदी से निर्मित गणेश प्रतिमा स्थापित करें.
– संकल्प के बाद पूजन कर श्री गणेश की आरती करें.
– तत्पश्चात श्री गणेश की मूर्ति पर सिन्दूर चढ़ाएं.
– अब गणेश का प्रिय मंत्र- ‘ॐ गं गणपतयै नम:’ बोलते हुए 21 दूर्वा दल चढ़ाएं.
– श्री गणेश को बूंदी के 21 लड्डुओं का भोग लगाएं. इनमें से 5 लड्‍डुओं का ब्राह्मण को दान दें और 5 लड्‍डू श्री गणेश के चरणों में रखकर बाकी को प्रसाद स्वरूप बांट दें.
– पूजन के समय श्री गणेश स्तोत्र, अथर्वशीर्ष, संकटनाशक गणेश स्त्रोत का पाठ करें.
– ब्राह्मण को भोजन करवाकर दक्षिणा दें. अपनी शक्ति हो तो उपवास करें अथवा शाम के समय खुद भोजन ग्रहण करें.
– शाम के समय गणेश चतुर्थी कथा, श्रद्धानुसार गणेश स्तुति, श्री गणेश सहस्रनामावली, गणेश चालीसा, गणेश पुराण आदि का स्तवन करें. संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करके श्री गणेश की आरती करें तथा ‘ॐ गणेशाय नम:’ मंत्र की माला जपें.

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पूजा का समय
08 फरवरी 2019 शुक्रवार विनायक चतुर्थी 11:30 से 13:40

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