Vinayak Chaturthi March 2019: मार्च महीने की विनायक चतुर्थी 10 मार्च रविवार को है. इस दिन भगवान गणेश की पूजा का विशेष विधान बताया गया है. ऐसी मान्‍यता है कि इस दिन गणेश पूजा से सभी मानोकामना पूर्ण हो जाती है.

हिन्‍दू धर्मग्रन्थों के अनुसार चतुर्थी तिथि भगवान गणेश की तिथि है. अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं. मार्च में ये चतुर्थी 10 मार्च (रविवार) को है. विनायक चतुर्थी पर पूजा का विशेष मुहूर्त सुबह 11:21 से दोपहर 13:41तक का है. कहा जाता है कि इस चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा से सभी कार्य सिद्ध होते हैं. सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और सुख-सुविधाएं मिलती हैं.

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विनायक चतुर्थी व्रत कथा
एक बार भगवान शिव और माता पार्वती नदी किनारे समय व्यतीत कर रहे थे. तभी मां पार्वती ने भगवान शिव से चौपड़ खेलने को कहा. दोनों ने चौपड़ खेलना शुरू किया लेकिन मुश्किल ये थी कि हार-जीत का फैसला कौन करेगा. इसके लिए शिवजी ने एक समाधान निकाला. उन्‍होंने घास-फूस से एक बालक बनाकर उसमें प्राण प्रतिष्ठा कर दी. उन्होंने पुतले से कहा कि हम चौपड़ खेलते हैं, तुम हार-जीत का फैसला करना. खेल में तीन बार माता पार्वती जीतीं. लेकिन जब पुतले से पूछा गया तो उसने कहा कि महादेव जीते. इस पर माता पार्वती बहुत क्रोधित हुईं और उन्होंने बालक को कीचड़ में पड़े रहने का श्राप दे दिया.

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ये सुनते ही वह बालक उनसे माफी मांगने लगा और बोला कि उसने जानबूझकर ऐसा नहीं किया. बालक के माफी मांगने पर माता पार्वती ने कहा कि आज से एक साल बाद नागकन्याएं यहां आएंगी. उन नागकन्याओं के कहे अनुसार विनायक चतुर्थी का व्रत करने से तुम्हारे कष्ट दूर होंगे. इसके बाद उस बालक ने गणेश जी की उपासना की और भगवान गणेश प्रसन्न हो गए. प्रसन्न होकर उससे वर मांगने को कहा. बालक ने कहा हे भगवान मुझे इतनी ताकत दें कि मैं अपने माता-पिता को देखने कैलाश पर्वत जा सकूं. गणेश जी के आशीर्वाद से बालक कैलाश पर्वत पर पहुंच गया.

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चौपड़ वाले दिन से माता पार्वती शिवजी से विमुख हो गई थीं. इसलिए देवी के रुष्ट होने पर भगवान शिव ने भी बालक के बताए अनुसार 21 दिनों तक श्री गणेश का व्रत किया. इस व्रत के प्रभाव से माता पार्वती के मन से भगवान शिव के लिए जो नाराजगी थी, वह समाप्त हो गई. तब यह व्रत विधि भगवान शंकर ने माता पार्वती को बताई. माता पार्वती के मन में भी अपने पुत्र कार्तिकेय से मिलने की इच्छा जागृत हुई. तब माता पार्वती ने 21 दिन तक श्री गणेश का व्रत किया तथा दूर्वा, फूल और लड्डूओं से गणेशजी का पूजन-अर्चन किया. व्रत के 21वें दिन कार्तिकेय स्वयं माता पार्वतीजी से आ मिले. उस दिन से श्री गणेश चतुर्थी का यह व्रत समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला व्रत माना जाता है. इस व्रत को करने से मनुष्‍य के सारे कष्ट दूर होकर मनुष्य को समस्त सुख-सुविधाएं प्राप्त होती हैं.

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