उज्जैन: विश्व प्रसिद्ध बारह ज्योतिर्लिगों में से एक उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती में शामिल होने के लिए दिव्यांगों को वीआईपी का दर्जा दिया गया है. इसकी शुरुआत मकर संक्रांति से हो गई है. हर दिन 20 दिव्यांग अपने सहायक के साथ भस्म आरती में हिस्सा ले सकेंगे. Also Read - मिसाल: 80 साल की उम्र में 'दादी अम्मा' ने पीएचडी की, देखें हौसलों की उड़ान...

भगवान महाकाल की भस्म आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्घालु यहां आते हैं. यहां आने वाले दिव्यांगों को भस्म आरती में शामिल होने के दौरान समस्या का सामना करना होता है. दिव्यांगों की समस्या की जानकारी होने पर जिलाधिकारी शशांक मिश्र ने विशेष इंतजाम करने के निर्देश दिए. साथ ही दिव्यांगों को विशेष अनुमति के प्रशासक को निर्देश दिए. इस मंदिर में दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई गई है, इसी के चलते मंदिर को दिव्यांग फ्रेंडली अवार्ड भी मिल चुका है. जनसंपर्क अधिकारी संतोष उज्जैनी ने बताया है कि मकर संक्रांति से दिव्यांगों को भस्म आरती में शामिल होने का असर मिलने लगा है. प्रशासक एसएस रावत ने बताया कि दिव्यांगों की भस्म आरती में शामिल होने की प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक वीआईपी काउंटर पर अनुमति प्रदान की जाएगी. Also Read - Chintaman Ganesh Temple: उज्जैन के चिंतामन गणेश मंदिर में बेचे जाएंगे चांदी के सिक्के, कीमत जल्द की जाएगी तय

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इतने दिव्यांगों को हर रोज मिलेगा वीआईपी प्रवेश
उल्लेखनीय है कि 20 दिव्यांगों तथा इनके साथ 20 अटेंडेंट को भस्म आरती की वीआईपी कोटे से परमिशन दी जाएगी. दिव्यांगजन भस्म आरती की परमिशन के दौरान उन्हें अपना विकलांगता का मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी किया गया प्रमाण-पत्र तथा परिवार के अटेंडर या सहायक का परिचय-पत्र उपलब्ध कराया जाना आवश्यक होगा. बताया गया है कि भस्म आरती में अनलाइन 800 तथा आफलाइन 450 श्रद्घालुओं को प्रतिदिन अनुमति दी जाती है. आफलाइन-आनलाइन अनुमति भी दिव्यांगजनों के लिए उपलब्ध रहेगी.