Vishwakarma Jayanti 2019: देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा की जयंती आज 17 फरवरी को मनाई जा रही है. ऐसी मान्यता है कि माघ माह की त्रयोदशी के दिन विश्वकर्मा जी का जन्म हुआ था. हालांकि उनके जन्म दिन को लेकर कुछ भ्रांतियां भी हैं. अत: कई स्थानों पर विश्वकर्मा जयंती रविवार को मनाई जा रही है. जबकि कुछ जानकारों का मानना है कि भगवान विश्वकर्मा का जन्म आश्विन कृष्णपक्ष की प्रतिपदा तिथि को हुआ था.

विश्वकर्मा पूजा का महत्व
ऐसी मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा ने ही सतयुग के स्वर्ग लोक, श्रेता युग की लंका, द्वापर की द्वारिका और कलयुग की हस्तिनापुर की रचना की. यहां तक कि सुदामापुरी का निर्माण भी उन्होंने ही किया. ऐसे में यह पूजा उन लोगों के ज्यादा महत्वपूर्ण है, जो कलाकार, बुनकर, शिल्पकार और व्यापारी हैं.

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ऐसे करें पूजा
1. विश्वकर्मा पूजा के दिन सुबह में स्नान-ध्यान करने के बाद पत्नी के साथ पूजा के स्थान पर बैठ जाएं. अगर किसी फैक्ट्री या वर्कशॉप या ऑफिस में पूजा होने जा रही हो तो वहां के प्रमुख व्यक्ति को यह काम करना चाहिए. भगवान विश्वकर्मा की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह में ही होता है. इसलिए कोशिश करें कि सुबह में ही स्नान-ध्यान के बाद भगवान की पूजा करें.
2. भगवान की पूजा के लिए सभी जरूरी सामग्री पहले ही पूजा के स्थान पर रख लें. जैसे कि विश्वकर्मा की मूर्ति या तस्वीर, जल से भरा कलश, अक्षत (चावल), माला, फूल, चंदन, धूप, सुपारी, पीली सरसों आदि. पूजा करते समय बीच में किसी चीज के लिए उठना न पड़े, इसका इंतजाम कर लेना चाहिए.

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3. पूजा शुरू करने से पहले भगवान विष्णु का ध्यान करें और अब हाथ में फूल, अक्षत लेकर मंत्र पढ़ें- ऊं आधार शक्तपे नमः ऊं कूमयि नमः ऊं अनंतम नमः ऊं पृथिव्यै नमः ऊं श्री सृष्टतनया सर्वसिद्धया विश्वकर्माया नमो नमः. मंत्र पढ़ने के बाद हाथ में रखे अक्षत को चारों तरफ छिड़क दें और इसके बाद पीली सरसों लेकर चारों दिशाओं को बांध लें.
4. पीली सरसों से सभी दिशाओं को बांधने के बाद अपने हाथ में रक्षा सूत्र (पत्नी हों तो उनके हाथ में भी) बांध लें और हाथ में जो फूल रखा था उसे जल पात्र में रख दें. इसके बाद हृदय में देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करते हुए विधिवत पूजा शुरू करें.

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5. विश्वकर्मा पूजन के साथ-साथ आप जाप भी कर सकते हैं. अगर किसी बड़े प्रतिष्ठान या कारखाने में पूजा हो रही हो तो इसके लिए ब्राह्मण (पंडित/पुरोहित) की मदद ली जा सकती है. भगवान विश्वकर्मा की पूजा के साथ-साथ आप 1100, 2100, 5100 या 11 हजार जाप करा सकते हैं.

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निर्माण और सृजन के देव हैं भगवान विश्वकर्मा
भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पी यानी इंजीनियर कहा जाता है. निर्माण और सृजन के देवता के रूप में इनकी प्रतिष्ठा है. शास्त्रों में वर्णित है कि भगवान विश्वकर्मा ने ही ब्रह्मा के निर्देशानुसार इस पृथ्वी को मनुष्यों के रहने लायक बनाया. यहां तक कि देवताओं के रहने के लिए स्वर्ग लोक, कृष्ण की नगरी द्वारिका, भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र, महादेव का त्रिशूल आदि अस्त्र-शस्त्र भी विश्वकर्मा ने ही बनाए. इसके अलावा रावण की स्वर्ण नगरी लंका, महाभारत काल में हस्तिनापुर, पांडवों की नगरी इंद्रप्रस्थ और जगन्नाथ पुरी के मुख्य मंदिर का निर्माण भी विश्वकर्मा ने ही किया था. यही वजह है कि निर्माण और कौशल के कर्म से जुड़े लोग बड़े पैमाने पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते हैं.

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