Vishwakarma Puja 2018 Aarti: आज पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ विश्वकर्मा पूजा का पर्व मनाया जा रहा है. विश्वकर्मा भगवान को ब्रह्मांड का पहला इंजीनियर और शिल्पकार कहा जाता है. देवलोक से लेकर धरती लोक तक और स्वर्गलोक से लेकर नर्कलोक तक उन्होंने ही बनाया है. यहां तक रावण की लंका को भी उन्होंने ही बनाया था.

Vishwakarma Puja 2018: विश्वकर्मा पूजा तारीख, शुभ मुहूर्त और महत्व

यही वजह है कि कोई भी भगवान विश्वकर्मा की पूजा के बगैर पूरा नहीं होता. हर साल लोग अपने घरों, दफ्तरों और कारखानों में विशेष रूप से पूजन करते हैं. खासतौर से लोग अपने वाहनों और मशीनों की पूजा जरूर करते हैं. ऐसी मान्यता है कि आज के दिन वाहनों की पूजा करने से विश्वकर्मा भगवान प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों को दुर्घटनाओं से बचाते हैं.

विश्‍वकर्मा पूजा में भगवान विश्‍वकर्मा की आरती भी की जाती है. ऐसा कहा जाता है कि भगवान विश्वकर्मा की पूजा के बाद आरती नहीं पढ़ी तो पूजा अधूरी मानी जाती है. इसलिए अगर भगवान विश्वकर्मा को प्रसन्न करना है तो आज के दिन भगवान विश्वकर्मा की आरती जरूर पढ़ें.

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विश्वकर्मा भगवान की आरती यहांं पढ़ें:

ॐ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु जय श्री विश्वकर्मा,
सकल सृष्टि के कर्ता रक्षक श्रुति धर्मा.

आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया,
शिल्प शस्त्र का जग में, ज्ञान विकास किया, जय श्री विश्वकर्मा…

ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नहींं पाई,
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई.

रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना,
संकट मोचन बनकर, दूर दुख कीना, जय श्री विश्वकर्मा…

जब रथकार दम्पती, तुमरी टेर करी,
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी.

एकानन चतुरानन, पंचानन राजे,
द्विभुज, चतुर्भुज, दशभुज, सकल रूप साजे, जय श्री विश्वकर्मा…

ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे,
मन दुविधा मिट जावे, अटल शांति पावे.

श्री विश्वकर्मा जी की आरती, जो कोई नर गावे,
कहत गजानन स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे, जय श्री विश्वकर्मा…

विश्वकर्मा पूजा विधि

1. प्रात: काल स्नान-ध्यान कर फैक्ट्री, ऑफिस या घर में पूजा करने बैठें.
2. विश्वकर्मा भगवान की पूजा के बीच से उठा नहीं जाता, इसलिए सारा इंतजाम कर बैठें.
3. अब भगवान विष्णु का ध्यान करें और अब हाथ में फूल, अक्षत लेकर मंत्र पढ़ें-
ऊं आधार शक्तपे नमः
ऊं कूमयि नमः
ऊं अनंतम नमः
ऊं पृथिव्यै नमः
ऊं श्री सृष्टतनया सर्वसिद्धया विश्वकर्माया नमो नमः.

4. मंत्र पढ़ने के बाद हाथ में रखे अक्षत को चारों तरफ छिड़क दें और इसके बाद पीली सरसों लेकर चारों दिशाओं को बांध लें.

5. पीली सरसों से सभी दिशाओं को बांधने के बाद अपने हाथ में रक्षा सूत्र (पत्नी हों तो उनके हाथ में भी) बांध लें और हाथ में जो फूल रखा था उसे जल पात्र में रख दें. इसके बाद हृदय में देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करते हुए विधिवत पूजा शुरू करें.

6. विश्वकर्मा पूजन के साथ-साथ आप जाप भी कर सकते हैं. अगर किसी बड़े प्रतिष्ठान या कारखाने में पूजा हो रही हो तो इसके लिए ब्राह्मण (पंडित/पुरोहित) की मदद ली जा सकती है. भगवान विश्वकर्मा की पूजा के साथ-साथ आप 1100, 2100, 5100 या 11 हजार जाप करा सकते हैं.

7. पूजा शुरू करने से पहले रक्षा दीप जलाएं और जल के साथ फूल और सुपारी लेकर संकल्प करें. संकल्प के लिए पुरोहित की मदद से मंत्र का जाप कर सकते हैं.

8. इसके बाद पूजा स्थल पर अष्टदल यानी 8 पंखुड़ियों वाला कमल फूल की अल्पना (रंगोली) बनाएं और वहां 7 तरह के अनाज रखें. अष्टदल पर कलश रखें. पांच पेड़ों के पत्ते, 7 तरह की मिट्टी, सुपारी और दक्षिणा कलश में डालकर उसे ढंक दें. इसके पश्चात पूजा करें.

9. भगवान विश्वकर्मा चूंकि निर्माण और सृजन के देवता हैं, इसलिए उनकी पूजा के साथ-साथ इस दिन औजारों, मशीनों और वाहनों की पूजा भी होती है. आप भी भगवान विश्वकर्मा की पूजा के बाद अपनी फैक्ट्री, वर्कशॉप या कारखाने के औजारों, मशीनों या वाहनों की पूजा करें. यदि संभव हो तो इन औजारों या मशीनों की अच्छी तरह से साफ-सफाई भी करें.

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