होली से पहले होलाष्‍टक की चर्चा शुरू हो जाती है. इन दिनों में कोई शुभ काम आरंभ नहीं किया जाता. पर ऐसा होता क्‍यों है? होलाष्‍टक का अर्थ क्‍या है और इसकी अशुभता के मायने क्‍या हैं? जानें इससे जुड़े हर तथ्‍य.

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होलाष्‍टक का अर्थ
होलाष्टक शब्द होली और अष्टक दो शब्दों से मिलकर बना है. इसका अर्थ होता है होली से पहले के आठ दिन. इसी दिन से होली उत्सव के साथ-साथ होलिका दहन की तैयारियां शुरू हो जाती है.

होलाष्‍टक की अशुभता क्‍या है?
ज्‍योतिष के अनुसार, होलाष्टक के दौरान सभी ग्रह उग्र स्वभाव में होते हैं. इसलिए इस दौरान जो शुभ कार्य किए जाते हैं उनका उत्‍तम फल प्राप्‍त नहीं होता. कहा जाता है कि होलाष्टक के दौरान अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहू उग्र स्वभाव में होते हैं.

क्‍या ना करें
इन दिनों में शुभ कार्य करने की मनाही होती है. इस समय में विवाह, गृह प्रवेश, निर्माण, नामकरण आदि शुभ कार्य वर्जित होते हैं. नए काम भी शुरू नहीं किए जाते. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन दिनों में जो कार्य किए जाते हैं उनस कष्ट, पीड़ा आती है. विवाह आदि किए जाएं तो भविष्‍य में संबंध विच्छेद, कलह का शिकार होते हैं.

होलाष्‍टक में दान
शास्त्रों के अनुसार होलाष्टक में व्रत, पूजन व दान का विशेष महत्‍व है. इन दिनों में किए गए व्रत और दान से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है. ईश्वर आशीर्वाद देते हैं. इसलिए इन दिनों में वस्त्र, अनाज आदि दान करने चाहिए.

होलाष्‍टक 2019
इस साल होलाष्टक 13 मार्च, बुधवार से शुरू होगा. 13 मार्च से 20 मार्च तक के समय में होलाष्‍टक रहेगा. 20 मार्च को होलिका दहन के साथ ये समाप्‍त होगा.

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