Yogini Ekadashi 2026: योगिनी एकादशी पर अगर दिख जाए ये 5 शुभ संकेत... समझिए भगवान विष्णु की है विशेष कृपा
Yogini Ekadashi 2026: जानिए योगिनी एकादशी की सही तिथि, शुभ योग और वे 5 शुभ संकेत जिन्हें धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु की विशेष कृपा का प्रतीक माना जाता है.
Yogini Ekadashi 2026
- योगिनी एकादशी 2026 की सही तिथि और शुभ योग
- भगवान विष्णु की कृपा से जुड़े 5 शुभ संकेत
- किन संकेतों को माना जाता है सौभाग्य का प्रतीक
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार क्या है इनका महत्व
Yogini Ekadashi 2026: सनातन धर्म में योगिनी एकादशी को भगवान विष्णु की आराधना के लिए बेहद पुण्यदायी माना गया है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत, पूजा और दान करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलने के साथ आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त होता है. कई धार्मिक परंपराओं में कुछ ऐसे शुभ संकेतों का भी उल्लेख मिलता है, जिन्हें भगवान विष्णु की कृपा का प्रतीक माना जाता है. हालांकि, ये धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं और इन्हें निश्चित भविष्यवाणी नहीं माना जाता.
कब है योगिनी एकादशी 2026?
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा. एकादशी तिथि 10 जुलाई को सुबह 8:16 बजे शुरू होकर 11 जुलाई को सुबह 5:22 बजे तक रहेगी. इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है. पंचांग के अनुसार व्रत के दिन शिव योग का संयोग भी बन रहा है, जिसे शुभ कार्यों और भगवान विष्णु की उपासना के लिए मंगलकारी माना जाता है.
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पूजा के समय दीपक का बिना बुझे देर तक जलना
धार्मिक मान्यता है कि यदि योगिनी एकादशी की पूजा के दौरान घी का दीपक बिना किसी बाधा के लंबे समय तक जलता रहे, तो इसे शुभ संकेत माना जाता है. कहा जाता है कि यह घर में सकारात्मक ऊर्जा और भगवान विष्णु की कृपा का प्रतीक हो सकता है.
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तुलसी का हरा-भरा और ताजा दिखना
भगवान विष्णु की पूजा तुलसी के बिना अधूरी मानी जाती है. यदि इस दिन तुलसी का पौधा विशेष रूप से हरा-भरा और ताजा दिखाई दे, तो लोकमान्यताओं के अनुसार इसे शुभ संकेत माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि घर में सुख-समृद्धि और शांति का वास बना रहता है.
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गाय की सेवा करने का अवसर मिलना
शास्त्रों में गौसेवा को पुण्यदायी बताया गया है. यदि योगिनी एकादशी के दिन गाय को भोजन कराने या उसका दर्शन करने का सहज अवसर मिल जाए, तो इसे भी शुभ संयोग माना जाता हैय मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और शुभ फल प्रदान करते हैं.
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शंख की ध्वनि सुनाई देना
शंख भगवान विष्णु के प्रमुख आयुधों में से एक है यदि इस दिन मंदिर में शंखनाद सुनने का अवसर मिले या पूजा के दौरान शंख बजाया जाए, तो इसे शुभ माना जाता है. धार्मिक विश्वास है कि इससे नकारात्मकता दूर होती है और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
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पीले फूल या विष्णु से जुड़े शुभ प्रतीकों का सहज दर्शन
योगिनी एकादशी पर यदि पूजा के समय पीले फूल, तुलसी, शंख या भगवान विष्णु से जुड़े अन्य शुभ प्रतीकों का सहज दर्शन हो जाए, तो कई धार्मिक परंपराएं इसे ईश्वरीय कृपा का संकेत मानती हैं.
शुभ संकेतों से ज्यादा जरूरी है सच्ची श्रद्धा
धर्मग्रंथों में बार-बार इस बात पर जोर दिया गया है कि भगवान विष्णु केवल बाहरी संकेतों से नहीं, बल्कि भक्त की सच्ची श्रद्धा, सात्विक आचरण और निष्काम भक्ति से प्रसन्न होते हैं.श्रद्धापूर्वक किया गया योगिनी एकादशी का व्रत और पूजा पूर्ण फलदायी मानी जाती है. इस दिन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप, विष्णु सहस्रनाम का पाठ, तुलसी अर्पित करना और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना अत्यंत शुभ माना गया है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.
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