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गाली देने पर भी बनता है पुलिस केस? जानिए क्या कहता है भारत का कानून, दोषी को कितने साल की हो सकती है जेल

जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों खूब वायरल हो रहा है, जिसमें एक लड़की पीएम मोदी के लिए आपत्तिजनक भाषा इस्तेमाल करते दिखी. ऐसे में सवाल उठता है क्या गाली देना भी अपराध माना जाता है?

By Gargi Santosh | Updated: August 3, 2026 9:04 PM IST

जंतर-मंतर के वायरल वीडियो से शुरू हुआ विवाद

दिल्ली में जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान एक युवती का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें वह पीएम मोदी के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करती दिखाई दी. फिर 30 जुलाई को नोएडा पुलिस ने शांति भंग, अपमान और मानहानि से जुड़ी BNS की धाराओं में FIR दर्ज कर ली. युवती की मां ने पुलिस को माफीनामा देकर पूरे मामले पर खेद भी जताया.

PM मोदी बोले- बच्चों को सजा नहीं, समझाना जरूरी

FIR के बाद 31 जुलाई को पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर नया वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने कहा कि कुछ भटके हुए बच्चों ने उन्हें और उनकी दिवंगत मां को गालियां दीं. पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे बच्चों को सजा देने के बजाय सही रास्ता दिखाना चाहिए और उन्होंने उन्हें माफ करने की बात कही. इसके बाद से यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बन गया.

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क्या गाली देना हमेशा अपराध माना है?

इस घटना के बाद से सोशल मीडिया पर कानून और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर बहस तेज हो गई. सवाल उठ रहे हैं कि क्या गाली देना अपराध माना जाता है? और अगर हां तो इन मामलों में आरोपी को क्या सजा मिलती है? कानूनी विशेषज्ञ कहते हैं कि हर गाली अपराध नहीं होती. अगर किसी शब्द का इस्तेमाल बिना अपमान करने की मंशा के सामान्य बातचीत में किया गया है, तो उसे अपराध नहीं माना जाता. सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि हर अभद्र शब्द अश्लील नहीं होता. कोई शब्द तभी अश्लील माना जाएगा, जब उसका उद्देश्य यौन अश्लीलता फैलाना या समाज को भ्रष्ट करना हो.

कब गाली देना कानून में जुर्म बन जाता है?

हां, अगर किसी व्यक्ति का अपमान करने, धमकाने, उसकी गरिमा या किसी महिला की मर्यादा को ठेस पहुंचाने की नीयत से गाली दी जाती है, तो यह अपराध बन सकता है. ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान) और धारा 351 (आपराधिक धमकी) के तहत केस दर्ज हो सकता है. दोषी पाए जाने पर 2 साल तक की जेल या जुर्माना हो सकता है.

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Gen-Z में गाली देना बन रहा नॉर्मल

दैनिक भास्कर ने विशेषज्ञों के हवाले से बताया कि आज के दौर में Gen-Z में गाली देना सामान्य बातचीत का हिस्सा बन गया है. इसके पीछे की वजह OTT प्लेटफॉर्म, वेब सीरीज और स्टैंड-अप कॉमेडी में बढ़ता अभद्र भाषा का इस्तेमाल है. सोशल मीडिया एल्गोरिद्म भी ऐसे कंटेंट को तेजी से फैलाते हैं, जिससे युवा इसे सामान्य भाषा की तरह अपनाने लगे हैं.

सोशल मीडिया ने बदल दी बच्चों की भाषा

विशेषज्ञों के मुताबिक, Gen-Z ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों जगह लगभग एक जैसी भाषा का इस्तेमाल करती है. WhatsApp, गेमिंग, Instagram और कॉलेज तक एक ही तरह की बोलचाल देखने को मिलती है. मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चे अपने आसपास की भाषा को तेजी से सीखते हैं, इसलिए सोशल मीडिया का असर उनकी बोलचाल पर साफ दिखाई देता है. (Photos from IANS, AI)