औषधीय गुणों से भरपूण-
भारत में प्राचीन काल से पान के पत्तों का विशेष महत्व रहा है. इसका इस्तेमाल 400 ईसा पूर्व से होता आ रहा है. आयुर्वेद और आधुनिक शोध दोनों पान के पत्तों के औषधीय गुणों की पुष्टि करते हैं. आयुर्वेद के ग्रंथों जैसे चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और कश्यप भोजनकल्प में भोजन के बाद पान चबाने की प्रथा का उल्लेख है, जो 75 ईस्वी से 300 ईस्वी के बीच प्रचलित हुई. वहीं, 13वीं शताब्दी में यूरोपीय यात्री मार्को पोलो ने भी भारत में राजाओं में पान चबाने का जिक्र किया था